Thursday, July 23, 2026

दिल्ली में आधी रात तुर्कमान गेट के पास अतिक्रमण हटाने को चला बुलडोजर, पुलिस पर हुआ पत्थराव

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में 6 और 7 जनवरी की देर रात अतिक्रमण हटाने को लेकर बड़ा प्रशासनिक अभियान चलाया गया। तुर्कमान गेट के पास स्थित मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन पर बने अवैध ढांचों को हटाने के लिए नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर की गई, जिसे नगर निगम दिल्ली (MCD) ने अंजाम दिया। रात करीब 1बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में 17 बुलडोजरों का इस्तेमाल किया गया। यहां बने बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर और कुछ दुकानों को ढहाया गया। कार्रवाई तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास की जमीन पर हो रही थी।

पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

कार्रवाई के दौरान हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और कर्मचारियों व पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जिसके बाद भीड़ को खदेड़ा गया।

इलाका 9 जोन में बांटा गया

सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। पूरे इलाके को 9 जोन में बांटा गया है और हर जोन की जिम्मेदारी ADCP स्तर के अधिकारियों को दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पत्थरबाजी में शामिल लोगों की पहचान सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के जरिए की जाएगी। वहीं, डीसीपी निधिन वलसन ने कहा कि यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही है और फिलहाल जारी है। पत्थरबाजी में 4 से 5 पुलिस अधिकारियों को मामूली चोटें आई हैं।

हाईकोर्ट के पुराने आदेश 

MCD का कहना है कि यह कदम 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्देशों के आधार पर उठाया गया। डिवीजन बेंच ने तुर्कमान गेट के पास रामलीला ग्राउंड से करीब 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसमें सड़क, फुटपाथ, पार्किंग, बारात घर और एक निजी क्लिनिक शामिल थे।

मस्जिद समिति की आपत्ति

फैज-ए-इलाही मस्जिद की प्रबंधन समिति ने 22 दिसंबर 2025 को जारी MCD के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। समिति का कहना है कि जमीन वक्फ संपत्ति है और इसके लिए वे दिल्ली वक्फ बोर्ड को लीज किराया देते हैं। समिति ने स्पष्ट किया कि उन्हें अवैध अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति नहीं है और बारात घर व क्लिनिक का संचालन पहले ही बंद किया जा चुका है। उनकी मुख्य आपत्ति कब्रिस्तान की जमीन को लेकर है।

 22 अप्रैल को अगली सुनवाई

6 जनवरी को ही हाईकोर्ट ने मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन से अतिक्रमण हटाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने MCD, शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली वक्फ बोर्ड सहित अन्य विभागों से जवाब मांगा है। जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि मामला सुनवाई योग्य है और सभी पक्षों को चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।

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एयर नाऊ स्पेशल

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न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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