झारखंड : हजारीबाग जमीन घोटाले की जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आ रहे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे, उनकी पत्नी स्वप्ना संचिता, विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह समेत परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान सहयोग के बजाय तथ्यों को छिपाने और जांच को भटकाने की कोशिशें की जा रही हैं।
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जांच में सामने आया असहयोग का रवैया
ACB द्वारा की गई पूछताछ और अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि विनय चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता जांच एजेंसी के सवालों का सीधा और स्पष्ट जवाब देने से बच रही हैं। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, वह बार-बार जांच को टालने, भ्रमित करने और अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रही हैं। कई अहम सवालों पर उनका रवैया असहयोगात्मक रहा है।
वित्तीय सवालों पर याद नहीं का जवाब
एसीबी की पूछताछ के दौरान यह देखा गया कि स्वप्ना संचिता से जब उनके व्यवसाय, बैंक खातों, कंपनियों, संपत्तियों और निवेश से जुड़े सीधे सवाल पूछे गए, तो अधिकतर मामलों में उन्होंने “याद नहीं है”, “बाद में देखेंगे”, “दस्तावेज ढूंढने होंगे” या “किसी और से पूछिए जैसे जवाब दिए।” जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल भूल या जानकारी की कमी नहीं, बल्कि जानबूझकर जांच से बचने की रणनीति है।
महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं किए गए उपलब्ध
ACB के मुताबिक, स्वप्ना संचिता ने पूछताछ के दौरान कई जरूरी वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इन दस्तावेजों में आयकर रिटर्न, बैंक रिकॉर्ड, निवेश से जुड़ी फाइलें और व्यवसाय से संबंधित कागजात शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजों की यह कमी बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताओं को छिपाने का संकेत देती है।
व्यवसाय और आय को लेकर विरोधाभासी बयान
स्वप्ना संचिता ने ACB के समक्ष स्वीकार किया कि उन्होंने अप्रैल 2006 में अपना व्यवसाय शुरू किया था। हालांकि, उस अवधि की इनकम टैक्स रिटर्न (वित्तीय वर्ष 2006–07) न तो प्रस्तुत की गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि उस समय आयकर रिटर्न दाखिल की गई थी या नहीं। जबकि वह दावा कर रही हैं कि उस समय उनकी आय थी, क्योंकि सर्विस टैक्स रिटर्न दाखिल किए गए थे, कार्यालय किराये पर लिया गया था और TIME जैसे संस्थान के साथ समझौता भी हुआ था।
रिकॉर्ड रखने को लेकर बदलते बयान
रिकॉर्ड और दस्तावेजों को लेकर भी स्वप्ना संचिता के बयान लगातार बदलते रहे। कभी उन्होंने कहा कि केवल पांच साल का ही डेटा सुरक्षित रखा जाता है, फिर बाद में कहा कि कोई रिकॉर्ड नष्ट नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रिकॉर्ड रखने की कोई लिखित नीति नहीं है। डिजिटल बैक-अप को लेकर भी वह कोई ठोस जानकारी नहीं दे सकीं।
कैश ट्रांजेक्शन और खातों की उलझन
ACB का मानना है कि रिकॉर्ड न देने के पीछे उद्देश्य पुराने लेन-देन, फीस कलेक्शन और कैश ट्रांजेक्शन की जांच से बचना है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि व्यक्तिगत खातों, पारिवारिक लेन-देन और कंपनियों या फर्मों के खातों के बीच कोई स्पष्ट वित्तीय सीमा नहीं रखी गई थी। गंभीर सवालों पर अक्सर “फैमिली ट्रांजेक्शन” या “प्राइवेट कंपनी का मामला” कहकर जवाब टाल दिया गया।
जांच जारी
एसीबी का कहना है कि यह पूरा मामला केवल जानकारी न होने का नहीं, बल्कि जांच से बचने और तथ्यों को छिपाने का प्रयास है। एजेंसी अब उपलब्ध सबूतों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी माध्यमों से तथ्यों को जुटाने में लगी है। आने वाले दिनों में पूछताछ का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एसीबी की नजर अब उन वित्तीय लेन-देन पर है, जिनका स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिल पाया है। यह मामला झारखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।


