ढाका: भारत विरोधी और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता पलटने वाले आंदोलन के प्रमुख चेहरे और ‘इंकलाब मंच’ के कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस उठा है। सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार को हुई उनकी मौत की खबर जैसे ही ढाका पहुँची, पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। प्रदर्शनकारियों ने नारे और पोस्टर के साथ हादी की सुरक्षा में नाकामी के आरोप लगाए।
बात दे कि प्रदर्शनकारियों ने ढाका समेत कई शहरों में आगजनी और पथराव कर कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मीडिया संस्थानों, राजनीतिक कार्यालयों और भारतीय राजनयिक मिशनों को निशाना बनाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है।
Highlights:

कैसे हुई उस्मान की हत्या?
उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका के बिजोयनगर में सिर में गोली मारी गई थी। गंभीर हालत में उन्हें एयर एम्बुलेंस से सिंगापुर ले जाया गया था, जहाँ 18 दिसंबर को उन्होंने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।
हिंसा और तनाव के बीच अबतक की बड़ी बातें:
- मीडिया संस्थानों पर हमला: ढाका के कारवान बाजार में उग्र भीड़ ने बांग्लादेश के दो बड़े अखबारों, ‘प्रथम आलो’ (Prothom Alo) और ‘द डेली स्टार’ (The Daily Star) की इमारतों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। धुएं के कारण कई पत्रकार घंटों अंदर फंसे रहे।


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सांस्कृतिक संगठन और भारतीय सहायक उच्चायुक्त पर भी हमला: उस्मान हादी के समर्थकों और छात्र संगठनों ने ढाका के अंदर और बाहर के कई जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। चटगांव में भी कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास के सामने बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। उन्होंने उच्चायोग पर ईंटें फेंकीं। सांस्कृतिक संगठन को भी आग के हवाले कर दिया गया।

- मुजीबुर रहमान के आवास में आग: राजशाही में प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के ऐतिहासिक आवास और अवामी लीग के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया है।
- सांस्कृतिक संस्था ‘छायानोट’ पर हमला: ढाका के धनमंडी इलाके में प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र ‘छायानट’ में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें हैं।

- पूर्व मंत्री के घर को किया आग के हवाले: आवमी लीग सरकार में पूर्व शिक्षा मंत्री रहे मोहिबुल हसन चौधरी नौफल के घर में बीटी रात प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया।
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हिंदू युवक को जलाया: बांग्लादेश में कुछ लोगों ने एक हिंदू युवक को पहले पीट-पीटकर मार डाला, उसके बाद ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए युवक के शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी।
- छात्रों का आक्रोश: ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध मार्च निकाला और गृह सलाहकार के इस्तीफे की मांग करते हुए उनका पुतला फूंका। ढाका विश्वविद्यालय के एक हॉल का नाम बदलकर ‘हादी हॉल’ रखने की भी खबरें हैं।
- भारत विरोधी नारे: हिंसक प्रदर्शनों के दौरान ढाका की सड़कों पर जमकर भारत विरोधी नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम सरकार पर हादी की सुरक्षा सुनिश्चित न करने का आरोप लगाया है।
- सैनिकों की तैनाती: ढाका और अन्य संवेदनशील शहरों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के साथ-साथ सेना की टुकड़ियों को भी तैनात किया गया है।
- हत्यारों पर इनाम: बांग्लादेश पुलिस ने हादी पर हमला करने वाले संदिग्धों की सूचना देने वाले को 50 लाख टका इनाम देने की घोषणा की है।
- यूनुस सरकार की अपील: अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने हादी को “जुलाई विद्रोह का निडर योद्धा” बताया और देश में शनिवार को आधे दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
- तारिक रहमान की यूनुस सरकार से अपील: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अंतरिम अध्यक्ष तारिक रहमान ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार से शरीफ उस्मान हादी की हत्या की जांच कराने और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कारेने की अपील की है।
- इंकलाब मंच की अपील: उस्मान हादी के संगठन इंकलाब मंच ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों से हिंसा रोकने की अपील की है। उन्होंने लिखा कि “बांग्लादेश के लोगों से अपील है कि वे किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहें। उस्मान हादी अपने दुश्मनों से न्याय के जरिए निपटना चाहते थे और उनसे वैचारिक रूप से लड़ना चाहते थे।”
उस्मान हादी का शव कब आएगा ढाका?
सिंगापुर की एंगुलिया मस्जिद में शरीफ उस्मान हादी की नमाज़-ए-जनाज़ा (इस्लामी अंतिम प्रार्थना) अदा की जाएगी। जिसके बाद उनके शव को सिंगापुर से ढाका भेज जाएगा।
कौन थे शरीफ उस्मान हादी?
बांग्लादेश में जुलाई क्रांति के प्रमुख चेहरे और दक्षिणपंथी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे 32 वर्षीय युवा नेता शरीफ उस्मान हादी। हादी, फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले थे। वे शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए तख्तापलट के सबसे मुखर चेहरों में से एक थे और अपनी कट्टरपंथी व भारत विरोधी विचारधारा के लिए जाने जाते थे।


