रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज शनिवार दोपहर 2 बजे रांची के एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पेश होंगे. साल 2023 और 2024 में ईडी की ओर से जारी समन मामले की अवहेलना को लेकर ईडी ने एमपी-एमएलए कोर्ट में कांड संख्या 02/2024 दर्ज कराया था. इस मामले में ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज एमपी एमएलए कोर्ट में पेश होंगे. कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कई बार बुलाए जाने के बावजूद न तो ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए उपस्थित हुए और न ही उन्होंने इस संबंध में पर्याप्त जवाब दिया।
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ईडी ने हेमंत सोरेन को कई समन भेजे थे, लेकिन आरोप है कि उन्होंने उनमें से अधिकांश समन का पालन नहीं किया। इस बाबत ईडी ने एमपी-एमएलए कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद एमपी एमएलए कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई और इस मामले में उन्हें व्यक्तिगत रूप से 12 दिसंबर को हाजिर होने का आदेश दिया था। हेमंत सोरेन ने इस आदेश के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि समन का जवाब दे दिया गया है, अत: उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जाए।
हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
3 दिसंबर 2025 को झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने फैसला किया कि आगे की सुनवाई में उन्हें हर तिथि पर निजी तौर पर पेश होने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि कोर्ट ने एक बार फिर उनकी 6 दिसंबर की पेशी तय की है यानी आज उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाज़िर होना है। कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि आगे की तारीखों पर उनकी जगह वकील अदालत में पेश हो सकते हैं, न कि खुद मुख्यमंत्री।
इस फैसले का मतलब
यह फैसला हेमंत सोरेन के लिए बड़ी राहत है। पहले उन्हें हर सुनवाई तिथि पर कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश था। जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अब कम-कमी से उनकी निजी उपस्थिति की अनिवार्यता नहीं रहेगी। इससे वह शासन-प्रशासन के कामों और अपने मंत्रालय के कर्तव्यों पर ध्यान दे सकेंगे, बिना हर सुनवाई तिथि की चिंता किए।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मामला खत्म हो गया है, कोर्ट में मुकदमा जारी रहेगा। अगर कोर्ट या ईडी चाहेगी, तो किसी भी सुनवाई पर उन्हें फिर से व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है। अपने ऊपर लगे छापेमारी और भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोपों के कारण हेमंत सोरेन इस मामले के दायरे में हैं।
ईडी ने आरोप लगाया था कि कई समन जारी करने के बाद भी वे मौजूद नहीं हुए। इसे अवहेलना माना गया। उनकी तरफ से दलील थी कि उन्होंने दो-दो समन का जवाब दिया था। और न्यायालय ने इस दलील को हरी झंडी दिखाई। आज की पेशी राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले की गति और फैसला जनता-पॉलिटिक्स दोनों के लिए मायने रख सकता है।


