Saturday, June 13, 2026

पंजाब में किसानों का व्यापक ‘रेल रोको आंदोलन’, 19 जिलों के 26 स्थानों पर ट्रेनें प्रभावित

पंजाब : पंजाब में आज यानी 5 दिसंबर 2025 को कृषि एवं बिजली से जुड़े प्रस्तावों के खिलाफ राज्यव्यापी ‘रेल रोको आंदोलन’ की तैयारी हो रही है। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक राज्य के 19 जिलों में कुल 26 जगहों पर किसान रेलवे ट्रैक पर धरना देंगे, जिससे ट्रेन आवाजाही प्रभावित होगी।

किसानों की प्रमुख मांगे Electricity Amendment Bill 2025 के मसौदे को तुरंत रद्द करना, ग्रामीण इलाकों में लगाए जा रहे प्रीपेड बिजली मीटर हटाकर पुराने मीटर फिर से लगाने की व्यवस्था बहाल करना तथा राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक संपत्ति की कथित जबरन बिक्री के फैसले का विरोध करना जैसे शामिल है। किसान नेताओं का कहना है कि इन प्रस्तावों से ग्रामीण और कृषि-कल्याण से जुड़े लोगों पर वित्तीय बोझ पड़ेगा और इससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।

‘रेल रोको आंदोलन’ में हिस्सा लेने वाले जिला जैसे अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पठानकोट, गुरदासपुर, मोगा, बठिंडा, संगरूर, पटियाला, मालेरकोटला, मुक्तसर आदि शामिल होंगे। इन जिलों में रेलवे स्टेशनों या क्रासिंग पॉइंट्स पर किसान ट्रैक अवरुद्ध करेंगे।

किसान मजदूर मोर्चा ने इसे एक प्रतीकात्मक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन बताया है, जिसका मकसद सरकार व केंद्र की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करना है। हालांकि मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो आंदोलन और तेज रूप ले सकता है।

रेलवे प्रशासन ने भी इसे देखते हुए यात्रियों से आग्रह किया है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें। कुछ ट्रेन रूट्स रद्द या डायवर्ट किए जा सकते हैं। आम यात्रियों के लिए परेशानी हो सकती है, इसलिए जरूरी माना जा रहा है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था देखें।

पिछले कुछ महीनों से किसान संगठन और राज्य सरकार के बीच बिजली बिल, मीटर नीति, सार्वजनिक संपत्ति की नीजीकरण जैसी कई संवेदनशील विषयों पर मतभेद बढ़ा है। किसान मजदूर मोर्चा का कहना है कि ये कदम आम किसानों और ग्रामीणों के हितों के विपरीत हैं। इस रेल रोको आंदोलन को इसी असंतोष का नतीजा माना जा रहा है।

5 दिसंबर को होने वाले रेल रोको आंदोलन के बाद देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है। यदि किसानों की आवाज़ सुनी जाती है, तो आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त होगा। अन्यथा, किसान संगठन द्वारा विरोध को और तेज करने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी है।

एयर नाउ स्पेशल

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