Saturday, August 8, 2026

कुछ बुनियादी कारणों के जरिए समझिए शिक्षक संघ में क्यों जरूरी है दीक्षित : ओम सिंह ग्रुप

नई दिल्ली : सरकारी स्कूलों में कार्यरत् लगभग 50 हजार स्थायी शिक्षकों की एकमात्र संस्था ‘ गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (जीएसटीए) को ही 1980 से शिक्षा निदेशालय द्वारा मान्यता दी गई है। इसीलिए सरकार व निदेशालय में केवल इसी की बात सुनी जाती है। अतः शिक्षकों के हित के लिए इस संस्था का योग्य,अनुशासित और सशक्त होना भी जरूरी है।

गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ओम सिंह ने बताया कि साल 1956 में गठित इस एसोसिएशन के तीन वर्षीय चुनाव में शिक्षकों के भिन्न-भिन्न विचार धाराओं वाले ग्रुप चुनाव लड़ते रहे हैं। कुछ ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी पूरी की है। संघ के इस चुनाव में भी कुछ ग्रुप अपनी महत्वाकांक्षा लिए जोर अजमाइस में लगे हैं।

आज “एस.एन.दीक्षित-ओमसिंह” के नाम से जाना जा रहा ग्रुप समय-समय पर एसोसिएशन के पहले हुए चुनाव में अपने ग्रुप के शिक्षक नेताओं के नाम से प्रचलित रहा है। शुरू से ही यह ग्रुप गैर राजनीतिक होने के कारण निस्वार्थ भाव से केवल शिक्षकों की भलाई में रहा है। इसका प्रमाण है कि जब-जब भी यह ग्रुप जीएसटीए में रहा है तभी शिक्षकों को अनेकानेक लाभ हुए हैं। अच्छे वेतनमान और सेवा शर्तों से लेकर इस ग्रुप ने शिक्षकों को ऐतिहासिक लाभ दिलवाये हैं।

वर्ष 2014 से पूर्व जीएसटीए में रहकर इस ग्रुप की उपलब्धियां बेमिसाल रही हैं।स्थानाभाव के कारण सबका उल्लेख करना सम्भव नहीं है। पुराने शिक्षक साथी भी इस प्रमाण से अनभिज्ञ नहीं हैं। और तो और चुनाव लड़ रहे अन्य ग्रुपों के शिक्षक भी इस बात को स्वीकार करते हैं। पिछले 11 वर्ष से अधिक रही मौजूदा जीएसटीए आपसी कलह में बंटकर,कमज़ोर और निष्प्रभावी होती गई है। इससे एक-एक कर शिक्षकों को प्राप्त अधिकार और सुविधाएं उनसे छिनते गये। मौजूदा एसोसिएशन हाथ पर हाथ रख बैठी रही।

निदेशालय द्वारा किए गए शिक्षकों के भर्ती नियमों में बदलाव से उनके प्रोमोशन और नियुक्ति के लिए घटाई गई आयु सीमा का सीधा असर हुआ है। शिक्षकों के रोजमर्रा के कामकाज, महिला शिक्षकों के मातृत्व अवकाश, मेडिकल बजट, इलेक्शन ड्यूटी के लिए पहली रात को केन्द्रों पर रूकने की जटिलता, शिक्षकों के सम्मान और सुरक्षा तथा उनके ऊपर शिक्षण कार्य के अतिरिक्त बेमतलब के काम का बोझ। इन सबके चलते आज शिक्षक मानसिक पीड़ा से पीड़ित हैं जिससे उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करना भी मुश्किल हो गया है। मौजूदा एसोसिएशन के रहते अनावश्यक काम के तनाव से दुखी शिक्षकों में खुशी का ह्रास तो हुआ ही है,उनके मन के कोमल भाव पर भी असर पड़ा है।

जीएसटीए के पूर्व सचिव डी के तिवारी से बातचीत में बताया कि इन सब कारणों से शिक्षक संघ के आगामी चुनाव में ” दीक्षित-ओमसिंह “ग्रुप के ‘ विनोद शर्मा-अमन गहलोत ‘ पैनल को शिक्षक हित में समर्थन और सहयोग देकर विजय दिलाना समय की मांग है। यह पैनल योग्य, अनुशासित, व्यवहार कुशल और भाषाई मधुरता- मर्यादा से परिपूर्ण है। यह पैनल धन-बल के दिखावे से दूर केवल सधे हुए संस्कारी शिक्षकों का पैनल है। आप इसपर भरोसा और विश्वाश कर सकते हैं। यह ग्रुप ही आपकी आशा और आकांक्षा को पूर्ण कर, आपके मन में मुग्धता भर सकता है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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