देश : जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में राष्ट्रपति भवन में शपथ ले ली है। यह समारोह न केवल न्यायपालिका के लिए, बल्कि भारत के अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संबंधों के दृष्टिकोण से भी विशेष रहा।
इस शपथ-ग्रहण समारोह में भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के शीर्ष न्यायिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह पहली बार है कि किसी भारतीय CJI के शपथ ग्रहण में इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनधिमंडल (International Judicial Delegation) की उपस्थिति रही है।
जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति 30 अक्टूबर 2025 को घोषित की गई थी, और उन्होंने बी.आर. गवई की जगह ली है, जिनका CJI का कार्यकाल 23 नवंबर को समाप्त हुआ था। उनका कार्यकाल करीब 15 महीने का होगा और वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे, क्योंकि तब उनकी उम्र 65 साल पूरी हो जाएगी।
सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत हिसार जिला अदालत से की थी और बाद में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट व हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में भी जज के रूप में सेवा दी।
उनके न्यायिक करियर में कई महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं। जस्टिस सूर्यकांत कई संवैधानिक बेंचों का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के फैसले में अहम भूमिका निभाई, जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटा। इसके अलावा, वे उस बेंच में थे जिसने उपनिवेश काल के राजद्रोह कानून (sedition law) को अस्थायी रूप से निलंबित किया तथा सरकार से कहा कि उसकी समीक्षा हो।
वे पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई वाले पैनल का भी हिस्सा रह चुके हैं, जहाँ उन्होंने कहा कि राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर पूरी खुली छूट नहीं मिलनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने बिहार की मतदाता सूची में गुम हो चुके लाखों नामों की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश दिया था, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
सामाजिक न्याय के मामले में भी सूर्यकांत का योगदान अहम रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत अन्य बार एसोसिएशनों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का आदेश देने में भूमिका निभाई।
उनकी शिक्षा-पृष्ठभूमि भी प्रेरणादायक है। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से लॉ में मास्टर डिग्री प्राप्त की, और उसमें “फर्स्ट क्लास फर्स्ट” की उपाधि हासिल की थी।
नए सीजेआई बनते ही सूर्यकांत का सफर वकील-कैरियर से सर्वोच्च न्यायालय के शीर्ष पद तक पहुंचने की एक जीवंत मिसाल बन गया है। उनके शपथ-ग्रहण पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीशों की भारी मौजूदगी और लॉजिकल, संवैधानिक फैसलों की लंबी पारी इस बात को दर्शाती है कि भारतीय न्यायपालिका न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक रूप से भी गहरे सम्मान और भरोसे का केंद्र है।


