रांची : झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर राज्य में अनुसूचित जाति (SC) समुदाय की खराब सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन SC समुदाय की स्थिति अब भी अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से भी बदतर है।
वित्त मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि झारखंड सरकार समाज के हर वर्ग के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए संकल्पित है, लेकिन एससी वर्ग अब भी सबसे पिछड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 14 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 50 से 55 लाख लोग, अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, जिनमें से अधिकांश भूमिहीन हैं और मजदूरी पर निर्भर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि गरीबी सूचकांक के अनुसार एससी समुदाय के लोग आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उनकी औसत वार्षिक कृषि आय 50 हजार रुपये से भी कम है।
उन्होंने अपने पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राज्य में शीघ्र एससी आयोग और एससी परामर्शदात्री परिषद का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 338 के अनुरूप होगा, जिसमें अनुसूचित जातियों के संरक्षण, कल्याण और विकास के लिए आयोग के गठन का प्रावधान है।
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वित्त मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2018 में राज्य में एससी आयोग का गठन किया गया था, लेकिन अब तक उसे पूर्ण संरचना नहीं दी जा सकी है। इसलिए, आयोग का पुनर्गठन और सक्रिय संचालन समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठित इंडिया गठबंधन सरकार का यह नैतिक दायित्व है कि वह समाज के सबसे कमजोर वर्गों को न्याय और समान अवसर प्रदान करे। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि 2025-26 के वार्षिक बजट भाषण में भी एससी परामर्शदात्री परिषद के गठन की घोषणा की गई थी, जिसे अब जल्द लागू करने की आवश्यकता है।


