झारखंड : राज्य सरकार ने नगर निकाय चुनाव में पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षण की स्वीकृति दे दी है. राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वाडों) के गठन और आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. नगर निकायों में वार्डों के परिसीमन का आधार आबादी होगी. राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों और राज्य निर्वाचन आयोग को झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई करने के लिए कहा है. विभाग की अधिसूचना के बाद राज्य की सभी 48 नगरपालिकाओं में बहुप्रतीक्षित चुनाव कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है.
Highlights:
वार्ड गठन का फार्मूला
नगरपालिका अधिनियम के अनुसार वार्डों का गठन जनसंख्या के आधार पर किया जायेगा. अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के वार्डों का गठन जनसंख्या के आधार पर किया जायेगा. आबादी के अनुसार वार्डों का गठन प्रक्रिया के तहत किया जायेगा. नगर निकायों में पहले 1.5 लाख की जनसंख्या पर वार्डों की न्यूनतम संख्या 35 होगी. उसके बाद प्रत्येक 50 हजार की जनसंख्या पर एक वार्ड का गठन किया जायेगा. वार्डों में भौगोलिक निरंतरता भी रहेगी. यानी, वार्डों के क्षेत्र आपस में जुड़े होंगे. राज्य सरकार निर्वाचन क्षेत्रों में पहले अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की जनसंख्या आवंटन के आधार पर आरक्षण निर्धारित कर रही है. उसके बाद पिछड़े वर्गों यानी BC-1 और BC-2 के लिए आरक्षित सीटों का allotment किया जायेगा. यह सुनिश्चित किया जायेगा कि कुल आरक्षण किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो. महिला आरक्षण के लिए वार्डों के आवंटन में रोटैशन का सूत्र अपनाया जायेगा. साथ ही आगामी नगरपालिका चुनाव को प्रथम आम निर्वाचन मानते हुए यह प्रक्रिया पूरी की जायेगी.
नगर निकाय चुनाव कई वर्षों से लंबित

राज्य के 48 नगर निकायों में चुनाव पिछले पांच वर्षों से लंबित है। यह देरी मुख्य रूप से पिछड़े वर्ग के आरक्षण को लेकर उत्पन्न हुई थी। बीते 14 अक्टूबर को झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव और नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को तीन सप्ताह के भीतर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का सख्त निर्देश दिया था। सरकार ने अदालत को बताया था कि वह चुनाव के लिए तैयार है, ‘ट्रिपल टेस्ट’ यानि जनसंख्या सर्वे, पिछड़ेपन का वैज्ञानिक आकलन और स्थानीय निकायों में प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना शामिल है जो पूरी हो चुकी है और इसकी रिपोर्ट भी तैयार है। साथ ही, राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति भी कर ली गई है। हालांकि, सरकार ने पहले इसके लिए तीन माह का समय मांगा था, जिसे हाई कोर्ट ने सीधे तौर पर अस्वीकार कर दिया था। लेकिन अब निकाय चुनाव दिसम्बर – जनवरी में होने की पूरी संभावना है जहां रांची, हजारीबाग, मेदनीनगर, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, चास, आदित्यपुर और मानगो में नगर निगम के चुनाव होने हैं।
कहाँ कहाँ चुनाव होंगे
नगर परिषद के लिए गढ़वा, विश्रामपुर, चाईबासा, झुमरी तिलैया, चक्रधरपुर, चतरा, चिरकुंडा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा, गुमला, जुगसलाई, कपाली, लोहरदगा, सिमडेगा, मधुपुर, रामगढ़, साहिबगंज, फुसरो और मिहिजाम में चुनाव होने हैं। जबकि नगर पंचायत के लिए बंशीधर नगर, मझिआंव, हुसैनाबाद, हरिहरगंज, छतरपुर, लातेहार, कोडरमा, डोमचांच, बड़की सरैया, धनवार, महगामा, राजमहल, बरहरवा, बासुकीनाथ, जामताड़ा, बुंडू, खूंटी, सरायकेला और चाकुलिया में चुनाव होंगे।



