राँची: अफ्रीकी देश कैमरून में फंसे झारखंड के पाँच मजदूर, जो पिछले चार महीनों से वेतन न मिलने के कारण घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, आखिरकार सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं। गुरुवार (4 दिसम्बर) की सुबह मुंबई-हावड़ा मेल से पारसनाथ स्टेशन पहुँचने के बाद, जब ये मजदूर अपने गाँव पहुँचे, तो कई दिनों से चिंता में डूबे परिजनों ने मजदूरों को गले लगाकर राहत की साँस ली।
Highlights:
कैसे फंसे थे मजदूर?
गिरिडीह और हजारीबाग जिलों के ये पाँच मजदूर बेहतर रोजगार की तलाश में कैमरून गए थे। उनका आरोप है कि वहाँ की जिस कंपनी में वे कार्यरत थे, उसने उन्हें चार महीने से वेतन नहीं दिया। वेतन बंद होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें खाने-पीने की दिक्कतें आने लगी थीं। संकट बढ़ने पर, सभी मजदूरों ने समाजसेवी सिकंदर अली के माध्यम से सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया और सुरक्षित वतन वापसी की मार्मिक गुहार लगाई। वीडियो वायरल होते ही, झारखंड सरकार और विदेश मंत्रालय सक्रिय हुए और त्वरित कार्रवाई करते हुए मजदूरों के बकाया वेतन के साथ उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी का प्रबंध किया गया।
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कौन-कौन लौटे घर?
कैमरून से लौटने वालों में हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के ऊंचाघना निवासी सुनील महतो, सुकर महतो, करगालो के चंद्रशेखर कुमार, डीलों महतो और गिरिडीह जिले के डुमरी निवासी दिलचंद महतो शामिल हैं।
वापस लौटे मजदूरों ने सरकार, मीडिया और समाजसेवी सिकंदर अली के प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके पर सिकंदर अली ने कहा कि “रोजी-रोटी के लिए लाखों लोग विदेश जाते हैं, लेकिन वहां बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। सरकार को इन प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।”


