रांची: JSSC CGL की परीक्षा और इस परीक्षा के जरिये हुई नियुक्तियों को रद्द किये जाने के आदेश के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं. जिनपर अदालत सुनवाई कर रहा है. शुक्रवार को भी हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई.
Highlights:
पिछले सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार को काउंटर एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) दायर करने का निर्देश दिया था जिसके आलोक में शुक्रवार को सरकार की ओर से रमेश उरांव एवं अन्य के मामले में 42 पेज का काउंटर एफिडेविट दायर किया गया है. इसमें कही गई प्रमुख बातें बता रहे हैं.
इसे भी पढ़ें : झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता व JPSC और JSSC के वकील संजोय पिपरवाल से शनिवार को ईडी करेगी पूछताछ
1- राज्य सरकार ने याचिका को विचारयोग्य न मानते हुए खारिज करने की मांग की है. सरकार का तर्क है कि CID जांच में पूरी भर्ती प्रक्रिया ही शुरुआत से दूषित पाई गई है।
2- 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना (Notification No. 5408) के जरिए JSSC CGL (विज्ञापन संख्या 10/2023) परीक्षा को रद्द किया गया था. CID की जांच में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और संगठित गड़बड़ी उजागर हुई है।
3- प्रश्न पत्र तैयार करने, प्रिंटिंग और गोपनीय कार्यों का जिम्मा जिस आउटसोर्स एजेंसी (ICN Technology Limited) को दिया गया था उसके सीईओ (सोमांश प्रकाश) और अन्य ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
4-इसके अलावा निजी वेंडरों का एक सिंडिकेट जैसे BINSYS, ICN, TDPL सरकारी उपक्रमों (ITI Limited, WEBEL) की आड़ लेकर परीक्षाओं में अनियमितता कर रहा था
5-जांच में सामने आया कि परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को उत्तर रटाने के लिए नेपाल के बीरगंज, आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो जैसी जगहों पर ले जाया गया था
6-नेपाल ले जाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 को सफल घोषित किया गया था।
7- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि जब पूरी परीक्षा प्रणाली ही दूषित हो जाए, तो निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों को अलग करना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन होता है.इसलिए पूरी प्रक्रिया रद्द करना ही संवैधानिक रूप से सही और जनहित में है।
8- सरकार ने स्पष्ट किया कि सामूहिक धांधली के कारण परीक्षा रद्द करने के फैसले में प्रत्येक अभ्यर्थी को व्यक्तिगत नोटिस देना न तो कानूनी रूप से अनिवार्य है और ना ही व्यावहारिक।
9- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जारी की गई सभी नियुक्तियां आपराधिक जांच और अंतिम अदालती फैसले के अधी थीं, इसलिए अभ्यर्थी स्थायी सेवा या किसी पूर्ण अधिकार का दावा नहीं कर सकते
10-इसके साथी ही सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया है कि मामले में CID ने कांड संख्या 01/2025 दर्ज की है. जिसमें अब तक 28 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. इसके अलावा 265 सफल अभ्यर्थियों को नोटिस जारी किए गए हैं और जाँच में कई संदिग्धों के वित्तीय लेनदेन (रुपयों के लेन-देन) के सबूत मिले हैं.
JPSC की परीक्षा और इस परीक्षा के जरिये हुई नियुक्तियों को रद्द किये जाने के आदेश के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं. जिनपर अदालत सुनवाई कर रहा है. शुक्रवार को भी हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई. पिछले सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार को काउंटर एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) दायर करने का निर्देश दिया था जिसके आलोक में शुक्रवार को सरकार की ओर से आकांक्षा मिंज एवं अन्य के मामले में 48 पेज का काउंटर एफिडेविट दायर किया गया है. अपनी इस खबर में हम आपको काउंटर एफिडेविट में कही गई प्रमुख बातें बता रहे हैं.
प्रमुख बातें
1- राज्य सरकार ने याचिका को गलत और खारिज करने योग्य बताया है और कहा है कि याचिकाकर्ताओं ने सही तथ्य पेश नहीं किए हैं.
2- 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए JPSC परीक्षा (विज्ञापन संख्या 01/2024) की नियुक्तियों को जनहित में रद्द किया गया है. सीआईडी जांच में परीक्षा संचालन प्रणाली में व्यापक धांधली और गड़बड़ी सामने आई थी.
3- परीक्षा का प्रारंभिक और मुख्य काम ITI लिमिटेड द्वारा किया गया था. लेकिन डेटा प्रोसेसिंग, मुख्य परीक्षा की मेरिट लिस्ट, इंटरव्यू और फाइनल रिजल्ट आउटसोर्स एजेंसी TDPL द्वारा जारी किया गया था.
4-बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के, SOP का उल्लंघन करते हुए पूर्व अध्यक्ष द्वारा TDPL को काम दिया गया था.जबकि TDPL के निदेशक पूर्व में उत्तर प्रदेश में परीक्षा घोटाले के आरोप में जेल जा चुके हैं और JSSC ने भी 2025 में इस एजेंसी को डि-इम्पैनल कर दिया था
5- जांच में सामने आया कि OMR शीट में बदलाव, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से नंबर बढ़ाना, व्हाट्सएप पर आंसर-की भेजना और इंटरव्यू में भारी रकम लेकर सेटिंग करने का काम हुआ है.
6- सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि जब परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर धांधली होती है तो सही और गलत अभ्यर्थियों को अलग करना असंभव हो जाता है. ऐसी स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द करना ही कानूनी रूप से सही कदम है.
7- सरकार का कहना है कि यह किसी व्यक्तिगत कर्मचारी को हटाने की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं है. बल्कि दूषित चयन प्रक्रिया को रद्द करने का प्रशासनिक निर्णय है. इसलिए व्यक्तिगत नोटिस देना जरूरी नहीं था
8- इस मामले में CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज की गई है. इस मामले में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक, TDPL के निदेशकों सहित कई आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. जांच रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ही कैबिनेट ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था.


