उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत बड़ा बदलाव सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है, जिसमें कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। पहले प्रदेश में 15.44 करोड़ वोटर थे, जबकि ड्राफ्ट सूची के बाद यह संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। यानी करीब 18 प्रतिशत नाम सूची से बाहर हो गए हैं। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब मतदाता चुनाव आयोग की वेबसाइट या ECINET मोबाइल ऐप के जरिए अपना नाम देख सकते हैं। इसके अलावा बूथ लेवल ऑफिसर के पास उपलब्ध ड्राफ्ट सूची से भी जानकारी ली जा सकती है।
जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोग 6 फरवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरा जाएगा, जबकि किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाएगा। नाम में सुधार या पता बदलने के लिए फॉर्म-8 भरा जा सकता है। विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए फॉर्म-6A का विकल्प भी मौजूद है। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि इन फॉर्म को भरने के लिए किसी तरह की फीस नहीं लगेगी और इन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से जमा किया जा सकता है।
फॉर्म बूथ लेवल ऑफिसर, तहसील में बने मतदाता पंजीकरण केंद्र या चुनाव आयोग की वेबसाइट से प्राप्त किए जा सकते हैं। भरे हुए फॉर्म BLO, VRC या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जमा किए जा सकते हैं। आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 भी जारी किया है, जहां से मार्गदर्शन लिया जा सकता है। शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम सहयोग को देखते हुए विशेष कैंप लगाने की योजना भी बनाई गई है।
पहली बार वोट देने के योग्य हुए युवाओं के लिए भी अवसर दिया गया है। जो युवा 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष के हो चुके हैं, वे फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकते हैं। अब तक बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा हो चुके हैं, जिनकी जांच के बाद योग्य पाए जाने पर नाम जोड़े जाएंगे।
चुनाव आयोग के अनुसार, ड्राफ्ट सूची पर मिली दावा-आपत्तियों की जांच 27 फरवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद 6 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। यदि ड्राफ्ट सूची में शामिल किसी नाम पर आपत्ति आती है, तो संबंधित मतदाता को नोटिस दिया जाएगा और बूथ लेवल ऑफिसर द्वारा सत्यापन किया जाएगा। जांच में आपत्ति सही पाए जाने पर ही नाम अंतिम सूची से हटाया जाएगा।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश से पहले देश के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जा चुकी है, जिनमें कुल 3.69 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर लें।



