रांची: खेलगांव से टाटीसिल्वे तक की सड़क अब लोगों के लिए रोज का खतरा बनती जा रही है. इस पूरे रास्ते में कहीं अंधे मोड़ हैं, कहीं टूटी सड़क और कहीं ऐसे डिवाइडर जो सीधे हादसे की वजह बन रहे हैं. कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हालात अभी भी वैसे ही हैं. लोग डर के साथ सफर करने को मजबूर हैं.
Highlights:
खेलगांव से टाटीसिल्वे जाने वाली इस सड़क पर ऐसा कोई हिस्सा नहीं जहां आप पूरी तरह सुरक्षित महसूस करें. कहीं अचानक अंधा मोड़ सामने आ जाता है, तो कहीं सड़क इतनी खराब है कि गाड़ी संभालना मुश्किल हो जाता है. कई जगह डिवाइडर से गाड़ियां टकरा चुकी हैं, लेकिन वहां कोई खास सुधार नहीं दिखता.
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सुरक्षा सिर्फ नाम का
सबसे बड़ी समस्या यह है कि खतरनाक जगहों पर जरूरी संकेतक तक नहीं हैं. जहां बोर्ड लगे भी हैं, वहां वे साफ दिखाई नहीं देते. रात के समय तो हालत और खराब हो जाती है, क्योंकि सड़क किनारे लाइट की भी कमी है. ऐसे में ड्राइवर को मोड़ और सामने से आने वाली गाड़ी का अंदाजा नहीं लग पाता.
खेलगांव चौक बना जोखिम भरा प्वाइंट
खेलगांव चौक के पास सड़क की बनावट और ट्रैफिक का दबाव भी हादसों की वजह बन रहा है. यहां हर समय गाड़ियों की आवाजाही रहती है. थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है. बाबा चौक के पास का अंधा मोड़ इस सड़क का सबसे खतरनाक हिस्सा माना जा रहा है. यहां सामने से आने वाली गाड़ी अचानक दिखती है. तेज रफ्तार में चल रही गाड़ी को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
हाल के हादसे
12 सितंबर 2025 को सरला बिरला स्कूल बस की चपेट में आने से एक छात्रा की जान चली गई थी. इस घटना के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे. वहीं 30 सितंबर को खेलगांव के पास एक थार गाड़ी पलट गई. उसमें सवार छह लोग घायल हुए और मौके से भाग गए. इन घटनाओं से साफ है कि सड़क सिर्फ खराब नहीं है, बल्कि खतरनाक हो चुकी है.
लोगों की परेशानी, उनकी जुबानी
कृष्णा वर्मा का कहना है कि रोज इस सड़क से गुजरने वाले लोग डर के साथ चलते हैं. अचानक ब्रेक लगने से पीछे वाली गाड़ियों के टकराने का खतरा रहता है. प्रदीप महतो कहते हैं कि हर हादसे के बाद कुछ दिन चर्चा होती है, फिर सब भूल जाते हैं. स्थायी समाधान नहीं होता. राजेंद्र महतो के मुताबिक खराब सड़क के कारण दोपहिया चालकों को सबसे ज्यादा खतरा रहता है. वहीं श्वेता महतो का कहना है कि रात में कम रोशनी के कारण महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सफर और मुश्किल हो जाता है.
कैसे सुधरेगी सड़क
इस पूरे रास्ते का सही तरीके से सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए. पुलिस, ट्रैफिक विभाग और सड़क बनाने वाली एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा. जहां अंधे मोड़ हैं, वहां रोड मिरर और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं. टूटी सड़क की मरम्मत हो. हर ब्लैक स्पॉट पर स्ट्रीट लाइट, स्पीड ब्रेकर और साफ चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं. साथ ही डिवाइडर की डिजाइन भी ठीक की जाए और अवैध पार्किंग हटाई जाए. लोगों का कहना है कि हादसे के बाद मुआवजा देना ही समाधान नहीं है. असली जरूरत है कि उसी जगह अगला हादसा न हो. जब तक जमीन पर सही बदलाव नहीं होगा, तब तक खेलगांव से टाटीसिल्वे तक का यह सफर खतरे से खाली नहीं होगा.


