रांची : चौथे जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में चुने गये झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रूपेश कुमार को फिर से निलंबित कर दिया गया है. रूपेश कुमार पर फर्जी तरीके से दूसरे व्यक्ति के खतियान एवं गलत शपथ के आधार पर बीसी 1 यानी पिछड़ा वर्ग एक का जाति प्रमाण पत्र बनाकर नौकरी हासिल करने का आरोप है. मिली जानकारी के अनुसार फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी पाने के आरोपों के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाई गई थी और आरोप प्रमाणित होने के बाद उनसे दो बार स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
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बाद में यह मामला झारखंड हाईकोर्ट भी पहुंचा, इस बीच पूरे मामले की समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने 5 जुलाई 2023 की तिथि से उन्हें निलंबित किया था। हालांकि 15 जुलाई 2023 को न्यायालय के द्वारा पारित आदेश से उन्हें निलंबित करने का आदेश निरस्त कर दिया गया था। हालांकि बाद में फिर राज्य सरकार ने वाद दायर किया जिसके बाद कोर्ट ने उन पर विभागीय कार्रवाई चालू रखने की इजाजत दी। उसके बाद नए सिरे से आरोप गठित कर जांच की गई, जिसे जांच प्रतिवेदन अभी अप्राप्त है।
पत्नी ने सरकार को लिखी चिट्ठी
इस बीच आरोपी अफसर रूपेश कुमार की पत्नी नेहा कुमारी ने 28 मई 2025 को सरकार के समक्ष पत्र के जरिए अभ्यावेदन दिया, जिसमें नेहा कुमारी ने अपने पति रूपेश कुमार के लंबे समय से निलंबित रहने और इसके कारण उनकी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्थिति खराब होने का जिक्र किया। हालांकि सरकार ने उनके आवेदन पर विचार करने के बजाए रूपेश कुमार के द्वारा गलत जाति प्रमाण पत्र और जिला पदाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर नौकरी पाने को गंभीर मामला मानते हुए पूर्व में 5 जुलाई 2018 की तिथि से निकाले गए निलंबन की अधिसूचना को विलोपित कर नए सिरे से उन्हें फिर से उसी तिथि से निलंबित कर दिया.


