न्यूज डेस्क: नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विवादों में घिरे गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे देया। उन्होंने महज 26 दिनों के कार्यकाल के बाद पद छोड़ा है। सुधन गुरुंग पर कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक संबंध और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश के आरोप लगे थे। इन आरोपों को बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
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भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर उठे सवाल
गृह मंत्री बनने के बाद गुरुंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। लेकिन बाद में उनके निजी निवेश और वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठने लगे। उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने और संदिग्ध कारोबारियों से संबंध होने के आरोप लगाए गए है। गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा की।
उन्होंने लिखा कि गृह मंत्री के रूप में उन्होंने पूरी ईमानदारी से काम किया, लेकिन उनके निवेश और शेयरों को लेकर जनता द्वारा उठाए गए सवालों को उन्होंने गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास किसी भी पद से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और नैतिकता उनके लिए सर्वोपरि है।
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जेनरेशन जेड आंदोलन का किया जिक्र
अपने बयान में गुरुंग ने नेपाल में चल रहे जेनरेशन जेड आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है और सार्वजनिक जीवन में साफ-सुथरी छवि बनाए रखना जरूरी है। नेपाली मीडिया में भी ऐसे दस्तावेज सामने आने की चर्चा हुई, जिनमें उनके वित्तीय संबंधों का जिक्र था। इसके बाद उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई थी। कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे थे।
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नेपाल सरकार में पहली भी हुई कार्रवाई
इससे पहले 9 अप्रैल को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को भी पद से हटा दिया था। उन पर अपनी पत्नी जूनू श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में पद पर बनाए रखने का आरोप था। जांच रिपोर्ट में इसे पद के दुरुपयोग का मामला बताया गया था। नेपाल में लगातार मंत्रियों पर लग रहे आरोपों और इस्तीफों ने वहां की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि सरकार इन मामलों पर आगे क्या कदम उठाती है।


