रांची : जदयू विधायक सरयू राय ने दावा किया है कि झारखंड सरकार के ऊर्जा विभाग की 160 करोड़ रुपए की एफडी गायब है। सोशल मीडिया एक्स पर दो पोस्ट में जमशेदपुर पश्चिमी विधायक का दावा है कि विभाग ने यह एफडी केनरा बैंक एवं एक अन्य बैंक में किया था। परिपक्वता तिथि आने पर अधिकारी जमा निधि निकालने बैंक गए, तो बैंकों ने कहा कि उनके यहां विभाग की कोई एफडी शेष नहीं बची है।
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सरयू राय ने मुख्यमंत्री से इस मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं, एक अन्य पोस्ट में सरयू राय ने लिखा है कि राज्य में चार माह अधिक समय से ऊर्जा विभाग बिना सचिव के चल रहा है। कोई प्रभारी भी नहीं हैं। होल्डिंग कंपनी ऊर्जा विकास निगम में सीएमडी नहीं हैं, वितरण में एमडी नहीं हैं। फिर भी विभाग का बजट बन रहा है, यह प्रबंधन का कमाल है।
बाबूलाल मरांडी ने भी उठाए सवाल
जदयू विधायक सरयू राय के इस बड़े दावे और खुलासे पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर किए पोस्ट में कई मुद्दों को उठाते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला. बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि टेंडर मैनेज करने और कमीशन उगाही में उलझने के बजाय अब ऊर्जा विभाग में सीधे सरकारी खजाने पर ही डाका डाला जा रहा है. बाबूलाल मरांडी ने इस मामले को चारा घोटाले से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह चारा घोटाले में कोषागार से फर्जी निकासी की गई थी, उसी तर्ज पर अब झारखंड के ऊर्जा विभाग से भी अवैध निकासी हो रही है.
उन्होंने कहा कि JBVNL के खातों में जमा होने वाले बिजली बिलों पर मिलने वाला ब्याज तक गबन कर लिया गया है. बाबूलाल मरांडी के अनुसार बिजली बिल के ब्याज समायोजन में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है. ऑडिट रिपोर्ट में भी 21.51 करोड़ रुपये का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं मिल रहा है. इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि पेयजल विभाग से भी खाते के माध्यम से 23 करोड़ रुपये निकाल लिए गए. बाबूलाल मरांडी ने आगे लिखा कि मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि चारा घोटाले की तर्ज पर ही झारखंड में ऊर्जा विभाग और पेयजल विभाग में सुनियोजित घोटालों को अंजाम दिया जा रहा है.
2024 में 107 करोड़ रूपए ट्रांसफर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीते अक्तूबर 2024 में ऊर्जा उत्पादन निगम और पर्यटन विभाग के कुल 107 करोड़ रुपये फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गये थे. जिसके बाद चार लोगों को हिरासत में लिया गया. इसी तरह ऊर्जा विभाग के खाते में 100 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का मामला सामने आया. जिसमें एटीएस ने जांच की ओर लगभग 1.30 करोड़ रुपये जब्त किए. इसके अलावा एक दूसरा मामला केनरा बैंक से ही जुड़ा हुआ था. जिसमें ऊर्जा विभाग के खाते से 44 करोड़ रुपये गायब होने की खबर आई. जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया.
मुख्य सचिव बनने से पहले थे प्रभार में
ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में अविनाश कुमार कार्यरत थे. और वे ऊर्जा विकास निगम लिमिटेट के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक यानी सीएमडी के पद पर भी थे. इसके अलावे उनके पास झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का भी कार्यभार था. लेकिन उनके मुख्य सचिव बनने के बाद यह पद खाली है. लेकिन अभी भी जेवीबीएनएल की वेबसाइट पर जाकर देखने पर अभी भी सीएमडी के नाम पर अविनाश कुमार का ही नाम दिखाई पड़ता है.


