रांची: झारखंड के हजारीबाग जिले में अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की प्रस्तावित गोंदलपुरा कोल माइनिंग परियोजना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि इस परियोजना के लिए करीब 832 एकड़ जमीन से जुड़े प्रकृति और मालिकाना अधिकार के दस्तावेज गायब या छुपा दिए गए हैं। इस मामले में भारत सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने झारखंड वन विभाग के विशेष सचिव से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर शुरू की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन के रिकॉर्ड हटाकर परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और लाभार्थियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
Highlights:
परियोजना और प्रभावित क्षेत्र
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और कई दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है। वहीं, 20 जनवरी को परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय लोक सुनवाई भी भारी विरोध के कारण रद्द करनी पड़ी थी। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार गोंदलपुरा कोल माइनिंग प्रोजेक्ट हजारीबाग जिले के बलोदर, गाली, हाहे, गोंदलपुरा और फुलांग गांवों के आसपास प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत लगभग 4 मिलियन टन सालाना कोयला उत्पादन की योजना बताई गई है। कुछ रिपोर्ट्स और संगठनों का दावा है कि इस परियोजना से खेती की जमीन, जंगल और घरों पर असर पड़ सकता है तथा कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि इन दावों को लेकर अलग-अलग पक्षों के अलग मत सामने आए हैं।
ग्रामीणों और संगठनों की चिंता
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि परियोजना से पर्यावरण, वन्य जीव और आजीविका पर असर पड़ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस इलाके में वन और कृषि भूमि मौजूद है, जिसको लेकर विवाद बना हुआ है। दूसरी ओर, ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए सरकार और कंपनियां कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही हैं, जबकि कई जगहों पर ऐसे प्रोजेक्ट्स को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
यह परियोजना पहले से ही जमीन अधिग्रहण और स्थानीय विरोध के कारण चर्चा में रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर जमीन अधिग्रहण या दस्तावेज से जुड़ी गड़बड़ी साबित होती है तो यह मामला राजनीतिक रूप से भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच के बाद ही साफ होगा कि जमीन रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितता हुई है या नहीं और आगे परियोजना पर क्या असर पड़ेगा।


