झारखंड : धनबाद में जहरीली गैस रिसाव से दो महिलाओं की मौत के बाद कोयला मंत्रलय ने बड़ा एक्शन लेते हुए बीसीसीएल के पुटकी एरिया के महाप्रबंधक को निलंबित कर दिया है। दरअसल, बीसीसीएल की केंदुआडीह कोलियरी क्षेत्र की राजपूत बस्ती में जहरीली गैस रिसाव के बाद राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। कोयला मंत्रालय, बीसीसीएल एवं धनबाद जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में त्वरित राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है. इस बीच ही प्रबंधन स्तर पर कार्रवाई करते हुए पुटकी एरिया के जीएम गणेश चंद्र शाह को सस्पेंड कर दिया गया है।
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कोयला सचिव विक्रम देव दत्त का आदेश

कोयला मंत्रालय भारत सरकार के कोयला सचिव विक्रम देव दत्त के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। उनका तबादला नहीं किया गया है और वे पुटकी में रहकर ही विभागीय कार्यों की निगरानी करेंगे। इसकी पुष्टि बीसीसीएल के वरीय अधिकारी ने की है। जानकारी के मुताबिक बीसीसीएल में अब तक 28 गैस प्रभावित लोगों का इलाज किया जा चुका है। साथी बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि हर संभव सहायता दिए जाएंगे। गैस रिसाव को लेकर आईएसएम आईआईटी और सैंपल के वैज्ञानिकों की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेष टीम भी गठित की गई है और तेंदुआ क्षेत्र में नजर भी रखी जा रही है।

मामला क्या है
3 दिसंबर की दोपहर को अचानक धनबाद में जहरीली गैस रिसाव की खबर सामने आई तो इलाके में हंड़कंप मच गया। चारो तरफ घना, काला और तीखी दुर्गंध वाला धुआं पूरे इलाके में उठने लगा। इससे लोगों को सांस लेना तक मुश्किल हो गया। इस जहरीली गैस की चपेट में दो महिलाएं आ गईं और उनका दम घुटने से मौत हो गई। जिनकी पहचान ललिता देवी और प्रियंका देवी के रूप में हुई है। हालांकि मौत का कारण गैस है या कुछ और इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।

ग्रमीणों का आरोप
कई लोगों को उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, जहरीली गैस का रिसाव होने के बाद ग्रमीणों का कहना है की 3 दिसंबर की सुबह होते ही पूरे इलाके में धुंआ छा गया। कई घरों के अंदर तक धुंआ भर गया। जिसके कारण लोगों को आंखों में जलन, तेजी खांसी, सांस लेने में समस्या, घुटन और सिरदर्द जैसी परेशानी होने लगी। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे अधिक बिगड़ने लगी। लिहाजा गैस रिसाव के चलते दो महिलाओं की मौत भी हो गई। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इस जमीन पर आग का खतरा लंबे समय से मंडरा रहा था। लेकिन इसे लेकर सही वक्त पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि अगर आग का दायरा और बढ़ा, तो पूरा इलाका झारिया की तरह बड़े संकट का सामना कर सकता है।

जांच कमेटी, राहत शिविर और शिफ्टिंग शुरू
मामला सामने आने के बाद डिप्टी कमिश्नर आदित्य रंजन ने जांच के लिए कमेटी का गठन किया। इसके साथ ही बीसीसीएल मैनेजमेंट को प्रभावित इलाकों के लोगों के लिए तुरंत राहत उपलब्ध करने का निर्देश दिया है। दो महिलाओं की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने सड़को पर आकर जमकर विरोध भी किया। डीसी आदित्य रंजन ने आगे कहा कि यह समस्या आज की नहीं दशकों पुरानी है। सालों पहले विस्थापन होना था जो नहीं हो सका। लोगों से अपील की गई की समय सीमा तय कर जल्द से जल्द सभी लोग डेंजर जोन से शिफ्ट हो जाए, इसके लिए बेलगाड़िया और करमाटांड में व्यवस्था की गई है। फिलहाल टेंट का निर्माण किया गया है। जहां रहना, खाना, पीना, शौचालय व बिजली आदि सभी की व्यवस्था की गई है। सभी नागरिक तत्काल टेंट में शिफ्ट हो जाएं और तब तक रहें जब तक की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती।

महिलाएं और बच्चे रिश्तेदारों के घर पहुंचे
प्रभावित राजपूत बस्ती और केंदुआ पांच नंबर की अधिकतर महिलाएं व बच्चे धनबाद , आसनसोल, गिरिडीह, पुटकी , आजाग नगर, वासेपुर और लोयाबाद में अपने-अपने रिश्तेदारों के घर शिफ्ट हो गए हैं। इधर, टेक्निकल टीम का कहना है कि दूसरी जगह पर शिफ्टिंग ही फिलहाल एकमात्र विकल्प है। टेक्निकल टीम के सैंपल के आधार पर कहा जा रहा है कि गैस का स्तर अब भी सामान्य से ज्यादा है। इसके अलावे बीसीसीएल के सीएमडी ने अगल से पीबी एरिया में बैठक कर मौजूदा हालात से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की मेडिकल इंतज़ाम, इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स और टेक्निकल मदद शामिल थी। इसके बाद उन्होंने डेंजर जोन से अस्थाई शेल्टर में शिफ्ट परिवारों से मुलाकात की महिलाओं और बच्चों से बात की और उन्हें पूरी मदद का भरोसा दिलाया।

इससे पहले सितंबर महीने में ही धनबाद के बाघमारा के कतरास में भारत कोकिंग कोल लिमेटेड के खदान क्षेत्र में जमीन धंसने की वजह से एक बड़ा हादसा हुआ था। हादसे में मजदूरों को ले जा रही सर्विस वैन लगभग 300 फीट से अधिक गहरी खाई में गिर गई थी। इस हादसे में वैन में मौजूद 6 मजदूरों की मौत हो गई थी। ऐसे में धनबाद में भू-धंसान और अग्निप्रभावित क्षेत्र में कब कहां गोफ बन जाए और जमीन धंस जाए, यह कोई नहीं जानता है। ऐसे डेंजर जोन वाले इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों की जिंदगी हर पल दांव पर लगी हुई है। अब देखना होगा की राजपूत बस्ती में जो जहरीली गैस का रिसाव हो रहा है और प्रभावित लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है।


