रांची: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार के साढ़े छह वर्षों का इतिहास युवाओं के सपनों की हत्या, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता और भर्ती घोटालों का इतिहास बन गया है। जिस सरकार ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, उसी सरकार के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाएं अविश्वास, भ्रष्टाचार और धांधली का पर्याय बन गई हैं।
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उन्होंने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि हेमंत सरकार के साढ़े छह वर्षों से ज्यादा के कार्यकाल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराई जाए। राज्य के शिक्षा मंत्री यानी मुख्यमंत्री को अविलंब इस्तीफा देना चाहिए। प्रतुल ने कहा कि पूरे आयोग पर गंभीर आरोप लगे हैं तो सभी सदस्यों को बर्खास्त कर पारदर्शी तरीके से नई नियुक्तियां होनी चाहिए। आज की प्रेस वार्ता में प्रदेश के सह मीडिया प्रभारी अजय राय भी उपस्थित थे।
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सीआईडी फ्रेंडली मैच खेल रही
प्रतुल ने कहा कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते के विरुद्ध गंभीर तथ्य सामने आने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं होना यह साबित करता है कि सीआईडी फ्रेंडली मैच खेल रही है और सिर्फ छोटी मछलियों को गिरफ्तार कर रही है। भाजपा इसका कड़ा विरोध करती है। जब तक आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों से रिमांड में कड़ाई से पूछताछ नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आएगा।
प्रतुल ने कहा कि खियांगते ने ही तत्कालीन सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का स्थानांतरण होने के बाद भी उन्हें विधिवत कार्यमुक्त नहीं किया गया।खियांगते ने अकेले परीक्षा परिणाम पर हस्ताक्षर किए। ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का चयन किया।
संवैधानिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़
उन्होंने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (प्रक्रिया) नियमावली, 2002 तथा भारत के संविधान के अनुच्छेद 315, 316 एवं विशेष रूप से अनुच्छेद 320 स्पष्ट करते हैं कि निजी एजेंसी को केवल तकनीकी एवं सहायक कार्यों के लिए सीमित रूप से लगाया जा सकता है। परीक्षा का संचालन, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, मूल्यांकन, मेरिट सूची तैयार करना तथा अंतिम चयन करना झारखंड लोक सेवा आयोग का मूल संवैधानिक एवं वैधानिक दायित्व है। इन अधिकारों का किसी निजी कंपनी को हस्तांतरण कानून और संविधान—दोनों की भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि यदि निजी एजेंसियों को आयोग के मूल अधिकारों में हस्तक्षेप करने दिया गया है, तो यह केवल प्रक्रिया की त्रुटि नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है। ऐसी स्थिति में केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा।
कांग्रेस की चुप्पी दोहरा चरित्र
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कांग्रेस का दोहरा चरित्र एक बार फिर उजागर हो गया है। दिल्ली में युवाओं के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस झारखंड में युवाओं के भविष्य की खुली लूट पर पूरी तरह मौन है। आखिर कांग्रेस बताए कि जेपीएससी में हुए कथित घोटालों पर उसकी जुबान क्यों बंद है? क्या सत्ता की कुर्सी ने उसके सिद्धांतों का गला घोंट दिया है? कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता भी जेपीएससी के सदस्य बने हैं जिन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। कांग्रेस बताएं कि हर बात पर धरना देने वाले राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा झारखंड से क्यों नदारद दिख रहे हैं।


