न्यूज डेस्क: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के शुभ अवसर पर यूपी के सीएम योगी ने प्रदेश के 15 लाख से अधिक श्रमिकों के लिए बड़ा ऐलान किया है. जिसमें उन्होंने कहा कि प्रदेश में श्रमिकों के ठहरने के लिए डोरमेट्री और सस्ती कैंटीन की व्यवस्था की जाएगी, जहां उन्हें किफायती भोजन, स्नानघर, मनोरंजन और सुरक्षा जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होगी.
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इसके साथ ही उन्होंने श्रमिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाने का ऐलान किया है. अबतक 12 लाख 26 हजार श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड दिया जा चुका है, जबकि 15 लाख 83 हजार निर्माण श्रमिकों को भी यह सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें करीब 80 लाख लोगों को हर साल 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज का लाभ मिलेगा.
3 करोड़ लोगों को मिला रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के माध्यम से 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है, जबकि लगभग 65 लाख लोगों को नया रोजगार उपलब्ध कराया गया है. उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश अब बीमारु राज्य की छवि से निकलकर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुक है. प्रदेश के हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किया गया है, जहां 1 हजार विद्यार्थियों के पढ़ने की व्यवस्था है और श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्व शिक्षा दी जाती है. जिसके बाद उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में केंद्रीय, नवोदय और सैनिक विद्यालयों के स्तर के शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, ताकि श्रमिकों के बच्चे भविष्य में उच्च पदों तक पहुंचे.
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फैक्ट्री मालिकों और ठेकेदारों को दी चेतावनी
श्रमिकों के हित में उन्होंने फैक्ट्री मालिकों और ठेकेदारों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब श्रमिकों से काम कराने के बाद भुगतान में टालमटोल या कटौती बर्दाश्त नहीं जाएगी. काम पूरा होने के बाद उन्हें पूरे पैसे दिए जाने चाहिए, अन्यथा सरकार उनपर सख्त कार्रवाई करेगी. पहले श्रमिकों का शोषण किया जाता था लेकिन अब सरकार उनके अधिकारों की रक्षा करेगी.
सीएम योगी ने कल्याणकारी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश भर में लगभग 4 करोड़ घर उपलब्ध कराए गए है, जहां उत्तर प्रदेश में लगभग 65 लाख घर शामिल है. राज्य में लगभग 16 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन उपलब्ध कराया जाता है. इसके साथ ही उन्होंने कोविड-19 महामारी का जिक्र किया जिसमें विपक्षी दलों की आलोचना की और आरोप लगाया कि वे संकट के समय अनुपस्थित थे, जबकि डबल इंजन सरकार ने राज्य में वापस लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों की सहायता की थी.


