बिहार की सियासत का मौसम फिर से तपने लगा है। चुनाव की आहट है और नेताओं का बिहार दौरा तेज़ हो गया है। अब समझ लीजिए, जहां नीतीश कुमार अपने महिला वोट बैंक को बचाने में लगे हैं, राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका को मैदान में उतार रहे हैं, वहीं बीजेपी ने अपने सबसे बड़े तुरुप के पत्ते को बिहार भेज दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह। अगले 10 दिनों में ये उनका दूसरा बिहार दौरा है। मतलब बीजेपी इस बार कोई रिस्क नहीं ले रही। शाह खुद कमान संभाल चुके हैं।
अमित शाह का दो दिवसीय बिहार दौरा
अमित शाह का ये दौरा दो दिन का है और चार जिलों में फैला हुआ है। 26 और 27 सितंबर को वो पटना, बेतिया, अररिया और समस्तीपुर में रहेंगे। शुक्रवार यानी 26 सितंबर को शाह बेतिया में लैंड करेंगे। गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में उनके हेलिकॉप्टर के लिए हेलीपैड बनाया गया है। दोपहर एक बजे उतरेंगे, फिर सीधा कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में 350 खास कार्यकर्ताओं से बैठक। कौन होंगे ये लोग? पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और सारण जिलों के सांसद, विधायक, विधान पार्षद, जिला अध्यक्ष, विधानसभा प्रभारी यानि बीजेपी का पूरा ज़मीनी ढांचा। शाह सबको सीधा चुनावी मंत्र देंगे।
लइसके बाद चार बजे बेतिया से रवाना और पटना पहुंचकर शाम 5 बजे पार्टी ऑफिस में एक और बड़ी बैठक। ये बैठक इंटरनेट मीडिया विंग की होगी। बीजेपी का डिजिटल आर्मी। सारे 52 संगठनात्मक जिलों के आईटी और सोशल मीडिया प्रभारी वहां मौजूद रहेंगे। शाह खुद बताएंगे कि ऑनलाइन नैरेटिव कैसे सेट करना है। रात का ठिकाना पटना का ही है, लेकिन रात में भी आराम नहीं। होटल मौर्य में 11 राज्यों से आए 45 सांसद और 45 विधायकों के साथ एक खास बैठक होगी। इन्हें बिहार के अलग-अलग इलाकों का चुनावी ज़िम्मा सौंपा गया है। साफ है कि शाह मैदान सजाकर ही पटना से उठेंगे।
अब आते हैं शनिवार 27 सितंबर पर। समस्तीपुर के सरायरंजन में मिथिला और तिरहुत क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ बैठक। फिर अररिया। यहाँ फारबिसगंज एयरपोर्ट मैदान में बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन होगा। 49 विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है। शाह सीधे सीमांचल और मिथिला-तिरहुत बेल्ट के कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। यहाँ की सियासत हमेशा से त्रिकोणीय रही है और शाह का मकसद साफ है कि आरजेडी और एआईएमआईएम की सेंधमारी को रोकना और बीजेपी को ज़मीनी मज़बूती देना।अब आपको याद दिला दूँ कि ये शाह का सिर्फ़ दूसरा दौरा है दस दिनों के अंदर। 18 सितंबर को वो डेहरी ऑन सोन और बेगूसराय आ चुके हैं। डेहरी में शाह ने शाहाबाद और मगध क्षेत्र की 80 सीटों पर जीत का टारगेट दिया था। वहीं बेगूसराय में उन्होंने पटना, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, खगड़िया और बेगूसराय समेत 10 जिलों के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी।
बेगूसराय की रैली में शाह की 5 बड़ी बातें
पहला: राहुल गांधी की यात्रा को उन्होंने ‘घुसपैठिया बचाव यात्रा’ बताया। बोले, राहुल बिहार के विकास के लिए नहीं, बल्कि घुसपैठियों को बचाने आए हैं।
दूसरा: लालू यादव पर तंज कसा कि वो बांग्लादेशियों को बचाना चाहते हैं। बोले, इन्हें वोट का अधिकार और राशन नहीं मिलना चाहिए, लेकिन लालू एंड कंपनी इन्हें बचाने में लगी है।
तीसरी: लालू-राबड़ी की सरकार को उन्होंने बिहार के विकास के लिए खतरा बताया। बोले, मोदी सरकार ने बिहार के लिए खजाना खोल दिया, जबकि लालू के वक्त हालात सबके सामने थे।
चौथी: उन्होंने साफ कर दिया कि बीजेपी का मकसद इस बार दो तिहाई से ज़्यादा बहुमत लाना है। और इसके लिए कार्यकर्ताओं को आज से ही जुट जाने की नसीहत दी।
पांचवीं: आरजेडी को सीधे ‘घोटालेबाज पार्टी’ कहा। बोले, चारा घोटाला, लैंड फॉर जॉब, रेलवे टेंडर—लालू जी के खाते में बस यही काम हैं।
महागठबंधन के खिलाफ बीजेपी की रणनीति
बिहार में इस बार का चुनाव आसान नहीं है। महागठबंधन भी पूरा दम लगा रहा है। प्रियंका गांधी को कांग्रेस ने बिहार में उतारा है, ताकि महिलाओं के वोट बैंक पर सेंध लगाई जा सके। नीतीश कुमार अपने पंद्रह साल पुराने महिला कार्ड को बचाने में लगे हैं। वहीं, तेजस्वी यादव बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। और उधर बीजेपी शाह के ज़रिए अपने कोर वोटर्स को एकजुट करने और संगठन को धार देने की कोशिश कर रही है। शाह का अंदाज़ आप जानते ही हैं। वो सीधे भिड़ते हैं। विपक्ष पर हमला बोलते हैं और कार्यकर्ताओं को मिशन मोड में काम करने का मंत्र देते हैं। इस बार भी यही हो रहा है। पटना से लेकर बेतिया, अररिया से समस्तीपुर हर जगह शाह का फोकस यही है कि पार्टी का ग्राउंड लेवल एक्टिव हो, सोशल मीडिया से लेकर गाँव तक बीजेपी का नैरेटिव फैले और चुनावी हवा बीजेपी के पक्ष में बने।
चुनाव की तैयारी पूरी
अब देखना होगा कि शाह की ये मैराथन मीटिंग्स और कार्यकर्ता सम्मेलन कितना असर दिखाते हैं। क्योंकि बिहार का चुनाव हमेशा से कॉम्प्लिकेटेड रहा है। जातीय समीकरण, महिला वोट, विकास योजनाएं, घोटाले, अपराध। सब कुछ इसमें घुला-मिला रहता है। बीजेपी को चुनौती महागठबंधन से भी है और छोटे दलों से भी। लेकिन अमित शाह का ये लगातार दौरा इस बात का साफ संकेत है कि बीजेपी इस बार बिहार को हल्के में नहीं ले रही। तो दर्शकों, ये थी कहानी अमित शाह के बिहार दौरे की। चुनावी समर सज चुका है, मोहरे चलने लगे हैं। प्रियंका गांधी महिला वोट बैंक साधेंगी, नीतीश अपने पुराने प्लान पर टिके हैं, और अमित शाह संगठन की कमान कस चुके हैं। आख़िर में फ़ैसला वही होगा जो मतपेटी से निकलेगा।


