रांची : स्वास्थ्य विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाए गए आरोपों और कुछ समाचार माध्यमों में प्रसारित भ्रामक खबरों को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बिना तथ्यों के जनता को गुमराह करने और राज्य सरकार की छवि धूमिल करने वाला बताया है. बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को राजनीतिक लाभ के लिए स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग पर निराधार आरोप लगाने से बचना चाहिए।
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फर्जीवाड़ा का हेड मास्टर बाबूलाल
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आगे कहा कि “फर्जीवाड़ा का हेड मास्टर बाबूलाल मरांडी हैं। वे एक सप्ताह के अंदर यह साबित करें कि जिन 251 एम्बुलेंसों की बात कर रहे हैं, वे आखिर कहां पड़ी हैं। यदि वे अपने आरोपों का प्रमाण नहीं दे पाए, तो मैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराऊंगा।” उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी को निम्न स्तर की राजनीति से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि “बाबूलाल जी के कई काले कारनामों की जानकारी मेरे पास भी है, लेकिन मैं उनका सम्मान करता हूं इसलिए व्यक्तिगत स्तर पर नहीं जाता। बाबूलाल मरांडी 15 वर्षों तक भाजपा को कोसते रहे, भाजपा के खिलाफ जहर उगलते रहे। उस समय उन्हें चैन और नींद नहीं आती थी, लेकिन आज भाजपा में शामिल होते ही उनका सुर पूरी तरह बदल गया है।”
दवाओं की खरीद के बाद गुणवत्ता की जांच
उन्होंने कहा कि दवाओं की खरीद के बाद उनकी गुणवत्ता की जांच अधिकृत लैब में कराई जाती है। जो दवाएं लैब टेस्ट में फेल हो जाती हैं अथवा जिनके आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाते, उनका वितरण नहीं किया जाता। ऐसी दवाओं के खिलाफ किसी प्रकार का भुगतान भी नहीं किया गया है। मंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या जनता की सुरक्षा से समझौता कर फेल दवाएं बांट दी जानी चाहिए?
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखना अनिवार्य होता है। कभी-कभी आवश्यकता नहीं होने या तकनीकी कारणों से कुछ दवाओं की समयावधि समाप्त हो जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार दवाओं का भंडारण बंद कर दे और जनता को असहाय छोड़ दे।
वेयरहाउस में दवाएं हुई एक्सपायर
वेयरहाउस में दवाओं के एक्सपायर होने के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश दवाएं लैब जांच या ड्रग कंट्रोल द्वारा अस्वीकृत किए जाने के कारण उपयोग में नहीं लाई गईं। उन्होंने बताया कि कुल दवा खरीद की तुलना में एक्सपायर्ड दवाओं की लागत एक प्रतिशत से भी कम है। साथ ही दवाओं के वितरण की पूरी प्रक्रिया सी-डैक के डीवीडीएमएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित होती है।
सीएजी को आधिकारिक जवाब
सीएजी द्वारा आयकर दायित्व पर उठाई गई आपत्ति को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इंडेंटर से प्राप्त राशि पर अर्जित ब्याज निगम की आय नहीं, बल्कि संबंधित इंडेंटर की राशि होती है। इस मामले में आयकर विभाग के समक्ष अपील दायर की जा चुकी है तथा 6 अप्रैल 2026 को सीएजी को आधिकारिक जवाब भी उपलब्ध करा दिया गया है।
पीएल खाते की राशि को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि झारखंड ट्रेजरी कोड, 2016 के अनुसार दो वित्तीय वर्षों के बाद राशि सरेंडर करने का प्रावधान है, लेकिन योजनाओं की आवश्यकता को देखते हुए वित्त विभाग से री-वैलिडेशन की प्रक्रिया जारी है। इसका जवाब भी समय पर सीएजी को भेजा जा चुका है।
नियुक्ति मामले पर विपक्ष फैला रहा भ्रम
शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव के नियुक्ति मामले पर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को सिरे से खारिज करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उनका पुराना अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया गया था। अक्टूबर 2025 में विधिवत विज्ञापन प्रकाशित कर वॉक-इन-इंटरव्यू की पारदर्शी प्रक्रिया के तहत उन्हें फुल टाइम रिटेनरशिप के आधार पर नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति पूरी तरह नियमसम्मत है और इसकी जानकारी भी सीएजी को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
104 हेल्पलाइन सेवा को लेकर मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में गुणवत्ता एवं लागत आधारित पद्धति (QCBS) के तहत पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। जांच के दौरान एक कंपनी द्वारा गलत अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के कारण उसके अंक कम किए गए और सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली संस्था मेसर्स बाबा कम्प्यूटर्स का चयन किया गया।
सभी 206 एम्बुलेंस पूरी तरह संचालित
108 एम्बुलेंस सेवा पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में खरीदी गई सभी 206 एम्बुलेंस पूरी तरह संचालित हैं। विशेषज्ञ समिति की जांच, एआरएआई प्रमाणन, आरटीओ रजिस्ट्रेशन और बीमा प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही इन्हें सेवा में शामिल किया गया। नियमों के तहत रोड टैक्स में भी छूट प्राप्त की गई थी।
कोरोना काल में स्थापित लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट को लेकर मंत्री ने कहा कि तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण प्रारंभिक योजना में संशोधन करते हुए 25 स्थानों पर 10 केएल क्षमता वाले प्लांट स्थापित किए गए। जीएसटी दर में बदलाव के बाद विधि महाधिवक्ता की राय लेकर ही भुगतान प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्लांट आपूर्ति करने वाली संस्था मेसर्स एमडीडी किसी भी प्राधिकरण द्वारा ब्लैकलिस्टेड नहीं है।
होगी कानूनी कार्रवाई
डॉ. इरफान अंसारी ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि तकनीकी प्रक्रियाओं को तोड़-मरोड़कर जनता के बीच भ्रम फैलाना बंद करें। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। यदि बिना सबूत के विभाग और सरकार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास जारी रहा, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


