लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ में साइबर ठगों ने महिला डॉक्टर को निशाना बना कर 1.55 करोड़ रुपए ठग लिए. साइबर ठगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी का प्रमुख बताया और प्रोविंशियल मेडिकल सर्विसेज से रिटायर डॉक्टर जिला सुल्ताना को 7 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और डरा-धमकाकर उनसे करोड़ो रुपए ठग लिए. इतनी बड़ी रकम की ठगी के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गई.
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न बताने की दी धमकी
जानकारी के अनुसार, पीड़िता डॉक्टर राणा प्रताप मार्ग स्थित शाहनजफ इमामबाड़ा कैंपस में अकेली रहती थी. उनके पति डॉक्टर साजिद की वर्षों पहले ही मृत्यु हो गई थी. 11 अप्रैल को उनके फोन पर एक वीडियो कॉल आई और उसने खुद को एटीएस अधिकारी आकाश सर्मा बताया, वहीं से घटना की शुरुआत हुई.
आरोपी ने बड़े ही कड़े लहजे में कहा कि डॉक्टर सुल्ताना के आधार कार्ड का उपयोग देशविरोधी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया गया है, जहां गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें महाराष्ट्र एटीएस से एनआईसी प्रमाणपत्र लेना होगा. उन्होंने मामले को और भी अधिक गंभीर बताते हुए कहा कि स्वयं एनआईए चीफ आपसे बात करेंगे. इसके साथ ही पीड़िता को धमकी दी गई कि अगर उन्होंने इस बात की जानकारी किसी भी अन्य व्यक्ति को दी तो उन्हें जेल होगी.
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7 दिनों तक डरा धमका कर की ठगी
इसी डर में जी रही डॉक्टर सुल्ताना से एक दूसरे व्यक्ति ने एनआईए बनकर बात की और कहा कि आंतरिक जांच में उनके बैंक खातों के लेन-देन की स्क्रूटनी की जाएगी. उन्हें 7 दिनों तक वीडियो कॉल में रखा गया, जिसे तकनीकी भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहते है. इस दौरान आरोपियों ने उनकी सभी बैंक खातों की जानकारी हासिल कर ली और 11-17 अप्रैल के बीच डरा-धमकाकर 4 अलग-अलग बैंक खातों से कुल 1.55 करोड़ रुपए आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करा लिया. अचानक आरोपियों की लालच बढ़ गई और उन्होंने पैसों की मांग की, उस समय डॉक्टर सुल्ताना खो शक हुआ. जिसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपने करीबी से बीत की और आपबीती सुना दी. उन्होंने तुरंत कहा कि वह साइबर ठगों का शिकार हुई है.
नागरिकों से अपील
इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना ब्रजेश कुमार यादव ने कहा कि पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया. फिलहाल पुलिस बैंक खातों को फ्रीज करने का प्रयास कर रही है जिससे पैसे ट्रांसफर की गई थी. इसके साथ ही जिन मोबाइल नंबर से कॉल आई थी उनका लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाली जा रही है.
प्रारंभिक जांच में गिरोह का तार अंतर्राज्यीय साइबर अपराधियों से जुड़ा होने की आशंका है. वहीं पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट पर कार्रवाई नहीं करता है, इस प्रकार से कॉल आने पर तुरंत 1930 पर सूचना दें.


