गुमला जिले की एक 13 वर्षीय आदिवासी छात्रा की रिम्स रांची में इलाज के दौरान हुई मृत्यु और कथित गैंगरेप के बाद चिकित्सा उपचार में देरी से जुड़े गंभीर मामले की जांच के लिए सरकार ने दो सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है. मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए बनाई गई समिति में दो वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है. जिनमें आईएएस नेहा अरोड़ा (विशेष सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग) और आईपीएस सरोजिनी लकड़ा (समादेष्टा, जैप-02) शामिल है.
Highlights:
घटना की पड़ताल और बयान: पूरी घटना की पृष्ठभूमि, तथ्यों की सत्यता और पीड़िता के माता-पिता व परिजनों के बयान दर्ज कर उनका परीक्षण करना.
पुलिस कार्रवाई की समीक्षा: पुलिस को घटना की सूचना कब और कैसे मिली, प्राथमिक दर्ज करने में कोई देरी तो नहीं हुई और अनुसंधान की पूरी विधिक प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या चूक हुई या नहीं, इसकी जिम्मेदारी तय करना.
– इलाज में देरी की जांच: कोलेबिरा, सिमडेगा सदर, गुमला सदर और रिम्स रांची में दिए गए इलाज, रेफरल की परिस्थितियों और समय के अंतर की जांच करना. इलाज या एम्बुलेंस और परिवहन में हुई किसी भी देरी की वजहों की पड़ताल की जाएगी.
– दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड का परीक्षण: केस डायरी, पुलिस अभिलेख, रेफरल पेपर, मेडिकल-लीगल डॉक्यूमेंट्स और अन्य जरूरी कागजातों की जांच की जाएगी.
लापरवाही पर कार्रवाई की सिफारिश
– यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा काम में लापरवाही, देरी या अनियमितता पाई जाती है, तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की अनुशंसा करना.


