Sunday, September 27, 2026

गिरिडीह में भूमाफियाओं के खिलाफ 10 गांवों के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कहा- जमीन पर कब्जे की कोशिश हुई तो आर-पार की लड़ाई

गिरिडीह : जिले की प्रसिद्ध बाबाजी कुटिया की जमीन को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है। वर्षों से आस्था, परंपरा और ग्रामीणों की सामूहिक जरूरतों से जुड़ी इस जमीन पर कथित तौर पर भूमाफियाओं की नजर पड़ने की बात सामने आने के बाद आसपास के करीब 10 गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि उनकी धरोहर जमीन पर किसी भी तरह के कब्जे या अतिक्रमण की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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बताया जाता है कि यह जमीन लंबे समय से बाबाजी कुटिया के नाम से प्रसिद्ध है। यहां कभी एक बाबा रहा करते थे। उनके निधन के बाद यह स्थान धीरे-धीरे ग्रामीणों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन गया। समय के साथ इस जमीन का उपयोग आसपास के गांवों के लोग सामूहिक और धार्मिक कार्यों के लिए करने लगे।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 10 गांवों के लोग प्रतिदिन इस स्थल से जुड़े हुए हैं। यहां ग्रामीण अपने गाय-बैल लेकर आते हैं। किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर उसके श्राद्ध कर्म और अन्य पारंपरिक कार्यक्रम भी इसी जमीन पर संपन्न किए जाते हैं। यही वजह है कि ग्रामीण इस जमीन को महज जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक और धार्मिक धरोहर मानते हैं।

इसी बीच जमीन पर कथित भूमाफियाओं की नजर पड़ने की चर्चा ने ग्रामीणों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण बाबाजी कुटिया की जमीन पर एकत्रित हुए। इस दौरान दिवंगत पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई और ग्रामीणों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने खुले मंच से जमीन की सुरक्षा को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। ग्रामीणों ने कहा कि बाबाजी कुटिया की जमीन किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि वर्षों से ग्रामीणों की आस्था और सामूहिक उपयोग से जुड़ी धरोहर है। इसे किसी भी कीमत पर कब्जे की कोशिश करने वालों के हवाले नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों ने कथित जमीन माफियाओं को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि यदि जमीन पर कब्जे का प्रयास किया गया तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। जरूरत पड़ी तो सभी गांवों के लोग एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से भी पूरे मामले की जांच कराने और जमीन की स्थिति स्पष्ट करते हुए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

फिलहाल ग्रामीणों के आक्रोश के बीच सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ सकता है। वहीं, ग्रामीणों के आंदोलन के ऐलान के बाद अब प्रशासन पर भी इस धरोहर स्थल को लेकर ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।

बाबाजी कुटिया की जमीन पर शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीणों की आस्था, परंपरा और सामूहिक अधिकार से जुड़ा सवाल बनता जा रहा है। ग्रामीणों के तेवर साफ हैं,धरोहर जमीन पर कब्जे की कोशिश हुई तो इस बार चुप्पी नहीं, बल्कि खुला संघर्ष होगा।

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एयर नाऊ स्पेशल

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