रॉंची: झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस पार्टी गंभीर रूप से चिंतित है। मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी प्रकार की मनमानी और अपारदर्शिता अथवा पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।
Highlights:
उन्होंने कहा कि 28 सितम्बर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से राज्यव्यापी आन्दोलन करेगी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के महासचिव सह संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने इसी बाबत वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिला कांग्रेस अध्यक्षों से बात कर आन्दोलन की तैयारियों की समीक्षा की है।
इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर में जमीन का कारोबार बन रहा वर्चस्व की नई जंग का मैदान, गोलियों की गूंज से सहमे कारोबारी
28 सितम्बर को जन-आंदोलन
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की संस्थागत जवाबदेही और निश्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब जनता को स्पष्ट रूप से मिलना चाहिए। 28 सितम्बर को सभी जिलों में निर्वाचन आयोग के खिलाफ जन-आंदोलन किया जायेगा तथा रॉंची में निर्वाचन आयोग के कार्यालय के समक्ष घेराव प्रदर्शन कर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया जायेगा। आजाद भारत में पहले ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी, लेकिन इस बार एसआईआर को बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाये गये, जो लोकतंत्र को कमजोर करता है।
ज्ञानेश कुमार को देना होगा-प्रदीप यादव
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने निर्वाचन आयोग और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाये और कहा कि 1950 में देश को संविधान और इसके बाद नागरिकों को मत का अधिकार मिला। लेकिन अब इस अधिकार को जबरन छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा निर्वाचन आयोग के माध्यम से मतदाताओं के नाम काटने के लिए अलग-अलग हथकण्डे अपना रही है, जिसका खास असर एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं पर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि नये मतदाताओं के लिए फार्म-6 की प्रक्रिया में बदलाव कर पूरी प्रक्रिया को जटिल बनाया गया है ताकि नये मतदाता इससे जुड़ न सकें। एसआईआर के दौरान मांगे जा रहे मैट्रिक का प्रमाण पत्र और जैक से उसका सत्यापन कराने की बात राज्य मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की, जो काफी गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखण्ड के निर्वाचन पदाधिकारी अपने आका को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक देश भर में तेरह करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जिससे पूरा देश आक्रोशित है।


