रांची: JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा उठाए गए सवालों पर कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने पलटवार किया है। आलोक दूबे ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता गंभीर विषय है और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। सरकार ने अगस्त 2026 में JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर जांच के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में अपना पक्ष रखा है। बाबूलाल मरांडी के सवालों का जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा। हाईकोर्ट ने CID जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त किया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।
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बता दें कि भाजपा नेता व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले में सरकार द्वारा अदालत में लगातार बदलते हलफनामे पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा था कि जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो पहले के हलफ़नामों का सच क्या था? जवाबदेही सिर्फ़ नीचे वालों की, संरक्षण ऊपर वालों को क्यों? सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि राज्य सरकार की ओर से हाई कोर्ट में दाख़िल हलफ़नामे में JSSC-CGL परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को दूषित बताया गया है। जब सरकार ख़ुद यह स्वीकार कर रही है, तो सवाल उठता है कि सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की इस चौकड़ी की भूमिका और जवाबदेही की जाँच क्यों न हो? पहले न्यायालय के सामने पूरे तथ्य क्यों नहीं रखे गए? क्या अदालत को गुमराह करने की कोशिश हुई थी?
उन्होंने कहा था कि सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही का है। क्या उनकी जानकारी और सहमति के बिना इतना बड़ा खेल संभव था? यदि सरकार को जानकारी नहीं थी, तो शासन और निगरानी कहाँ थी? यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? माननीय न्यायालय को इस पूरे पहलू का भी संज्ञान लेना चाहिए।


