Tuesday, June 23, 2026

लखनऊ अग्निकांड हादसे में पुलिस ने चार लोगों को किया गिरफ़्तार, दो सदस्यीय एसआईटी का गठन

लखनऊ : लखनऊ के अलीगंज इलाक़े में एक इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने सोमवार देर रात को चार लोगों को गिरफ़्तार किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस के हवाले से बताया कि गिरफ़्तार किए गए लोगों की पहचान राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू के रूप में हुई है.

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मामले में 4 अधिकारी भी निलंबित

अधिकारियों ने बताया कि अभियुक्त इमारत के संयुक्त मालिक हैं. पुलिस के मुताबिक़, अलीगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और उत्तर प्रदेश फ़ायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट से जुड़ी धाराओं के तहत छह नामज़द लोगों और अन्य के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार ने बयान जारी कर बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

आरोप है कि इमारत को रहने के लिहाज से मंज़ूरी मिली थी, लेकिन इसका ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से व्यावसायिक कामों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था. अलीगंज एसीपी शशि प्रकाश मिश्रा ने पीटीआई को बताया कि आरोपों की जांच की जा रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी.

मामले को लेकर सीएम नाराज

लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि पूरे अग्निकांड में लापवाही की बातें सामने आने से सीएम योगी बेहद नाराज हैं, उन्होंने हादसे को लेकर सोमवार को एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई थी, जिसमें उन्होंने अग्निकांड की जांच के लिए दो सदस्यी विशेष जांच दल के गठन का निर्देश दिया. शुरुआती जांच के आधार पर लखनऊ पुलिस ने इस मामले में 6 एफआईआर दर्ज की और बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही अब तक चार अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है.

2016 में इमारत अवैध घोषित

पुलिस जांच में ये भी सामने आया है कि अलीगंज योजना के सेक्टर स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का कुल क्षेत्रकुल 1992 वर्गफुट है और इसके लिए 20 अगस्त, 2014 को आवासीय नक्शा स्वीकृत किया गया था. हालांकि, 2016 में लखनऊ विकास प्रधिकरण ने इमारत को अवैध निर्माण को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था और मामले की सुनवाई के बाद 10 मई 2016 को बिल्डिंग को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया था. हालांकि, मालिकों के कोर्ट में आपत्ति के बाद जुलाई में ध्वस्तीकरण के आदेश को निरस्त कर दिया गया था.

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