Tuesday, June 23, 2026

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस ने मानी गंभीर चूक; SHO समेत 5 सस्पेंड, न्यायिक जांच के आदेश

पटना/भोजपुर: बिहार के भोजपुर में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस मुख्यालय ने पहली बार कैमरे के सामने आकर अपनी गंभीर गलती स्वीकार कर ली है। सोमवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लॉ एंड ऑर्डर के एडीजी (ADG) सुधांशु कुमार ने साफ शब्दों में माना कि 16 जून को हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम से बड़ी लापरवाही हुई थी और स्थिति को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया था। वहीं इस हाई-प्रोफाइल मामले में चौतरफा घिरी बिहार सरकार और पुलिस महकमे ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लेते हुए जांच का रुख मोड़ दिया है।

SHO सहित 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड

एडीजी ने पुलिस के स्तर पर हुई इस गंभीर लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। घटना के वक्त मौके पर मौजूद और लापरवाही बरतने वाले थानाध्यक्ष, 2 दरोगा, 1 एएसआई और 1 कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब इस पूरे केस की कमान शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंप दी गई है। घटना से जुड़े फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे न्यायिक जाँच

भरत तिवारी की मौत के बाद बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि इस पूरे एनकाउंटर की निष्पक्षता जांचने के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे। यह आयोग बिना किसी बाहरी या प्रशासनिक दबाव के पूरी घटना की स्वतंत्र रूप से जांच करेगा और अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। मामला न्यायिक आयोग के पास जाने की वजह से पुलिस मुख्यालय ने इस पर आगे कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।

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“एनकाउंटर पुलिस की उपलब्धि नहीं…”- एडीजी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडीजी सुधांशु कुमार ने पुलिस संस्कृति और एनकाउंटर को लेकर एक बेहद गंभीर और नीतिगत बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा “किसी भी एनकाउंटर को पुलिस की कामयाबी या उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता। कानून पुलिस को सिर्फ और सिर्फ आत्मरक्षा में सीमित बल प्रयोग करने का अधिकार देता है, वह भी तब जब पुलिसकर्मियों की जान पर बेहद गंभीर संकट आ गया हो। यही वजह है कि हर एनकाउंटर की बारीकी से जांच जरूरी है ताकि कानून का दायरा साफ रह सके।”

मामले पर गरमाई सियासत

इस एनकाउंटर को लेकर बिहार के सियासी गलियारों में भी तूफान खड़ा हो गया है। विपक्ष इस घटना को फर्जी एनकाउंटर बताते हुए लगातार नीतीश सरकार और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष के भी कई नेताओं ने इस कार्रवाई के तरीकों पर चिंता व्यक्त की है। अब राजनीतिक दलों से लेकर आम जनता तक, सभी की नजरें हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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