Saturday, June 13, 2026

झारखंड के सभी 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होंगे अपग्रेड, बनेंगे फर्स्ट रेफरल यूनिट

रांची : झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बेहतर और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत राज्य के कुल 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में अपग्रेड किया जाएगा। योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए पहले चरण में 20 सीएचसी का प्राथमिकता के आधार पर एफआरयू के रूप में विकसित किया जाएगा।

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इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सोमवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एनएचएसआरसी), नई दिल्ली की ओर से आज एक विशेष ऑनलाइन ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मातृत्व कोषांग की राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ पुष्पा ने बताया कि सभी चयनित स्वास्थ्य केंद्रों को आईपीएचएस मानकों के तहत तैयार किया जाएगा। इसके तहत इन केंद्रों में बुनियादी ढांचे, डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को 50% से 80% तक अपग्रेड किया जाएगा ताकि ये केंद्र पूरी तरह से क्रियाशील हो सकें।

प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने सबसे पहले इन स्वास्थ्य केंद्रों में कमियों का पता लगाने के लिए एक व्यापक ‘गैप एनालिसिस करने का निर्देश दिया है। गैप एनालिसिस की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मैनपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर कर इन्हें नेशनल सर्टिफिकेशन के लिए तैयार किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में सिविल सर्जन, जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। ओरिएंटेशन में इन सभी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ राहुल किशोर सिंह ने बताया कि एक सामान्य समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के के मुकाबले फर्स्ट रेफरल यूनिट में चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होती हैं। इसके शुरू होने से ग्रामीण स्तर पर ही जटिल प्रसव और सिजेरियन (सिटेयरियन सेक्शन) की सुविधा मिल सकेगी।

नवजात शिशुओं की देखभाल और आपातकालीन चिकित्सा के लिए मरीजों को सीधे बड़े जिला अस्पतालों या रिम्स रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन केंद्रों पर ब्लड स्टोरेज या ब्लड ट्रांसफ्यूजन की न्यूनतम व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है।

पहले चरण में चुने गए 20 सीएचसी को मॉडल एफआरयू के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके अनुभवों के आधार पर शेष 168 स्वास्थ्य केंद्रों का चरणबद्ध तरीके से कायाकल्प होगा। इस पहल से राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

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