Wednesday, July 29, 2026

झारखंड में 27 नक्सलियों ने किया सरेंडर, भारी मात्रा में हथियार भी सौंपे

रांची: झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को बड़ी सफलता मिली है। राज्य गठन के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में 27 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। सरेंडर करने वालों में 25 भाकपा माओवादी संगठन और 2 जेजेएमपी संगठन के उग्रवादी शामिल हैं। इन नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के सामने हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में आठ पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके खिलाफ कुल 426 नक्सली मामले दर्ज बताए गए हैं।

पुलिस मुख्यालय में हुआ आत्मसमर्पण कार्यक्रम

गुरुवार को रांची स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डीजीपी तदाशा मिश्र, एडीजी अभियान, एडीजी मनोज कौशिक, सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह और आईजी अभियान नरेंद्र सिंह की मौजूदगी में सभी नक्सलियों का आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण कराया गया। इस दौरान कई वरिष्ठ पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारी भी मौजूद रहे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस को भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और जिंदा कारतूस भी सौंपे। इनमें एक इंसास एलएमजी, पांच इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक बोल्ट एक्शन राइफल और एक पिस्टल शामिल हैं। इसके अलावा 31 मैगजीन और 2987 राउंड जिंदा कारतूस भी पुलिस को सौंपे गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह बरामदगी नक्सल संगठन के कमजोर पड़ने का बड़ा संकेत है।

कई बड़े इनामी नक्सली शामिल

सरेंडर करने वालों में कई बड़े और इनामी नक्सली शामिल हैं। इनमें विशेष क्षेत्र समिति सदस्य और एरिया कमांडर स्तर के उग्रवादी भी शामिल हैं। गादी मुण्डा उर्फ गुलशन पर 5 लाख रुपये का इनाम था और उसके खिलाफ चाईबासा, सरायकेला, रांची और खूंटी में 48 मामले दर्ज हैं। नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा पर भी 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ चाईबासा और सरायकेला में 38 मामले दर्ज हैं। रेखा मुण्डा उर्फ जयंती, सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल और सुलेमान हांसदा जैसे कई बड़े नाम भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल हैं। सरेंडर करने वालों में सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। उसके खिलाफ अकेले चाईबासा में 123 मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। इसके अलावा कई एरिया कमांडर और सक्रिय कैडरों ने भी हथियार छोड़ दिए हैं।

अन्य राज्यों में भी हुआ सरेंडर

कुछ नक्सलियों ने दूसरे राज्यों में भी आत्मसमर्पण किया है। विश्वनाथ उर्फ संतोष ने तेलंगाना में सरेंडर किया। वहीं पूनम उर्फ भवानी और समर दा उर्फ मधाई पात्रा ने भी दूसरे राज्यों में आत्मसमर्पण किया था। 15 लाख रुपये की इनामी बेला सरकार उर्फ आशा दी का नाम भी सूची में शामिल है।

सरकार की नीति का असर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति और सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहे हैं। बड़ी संख्या में शीर्ष कमेटी के सदस्यों का मुख्यधारा में लौटना माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने अन्य नक्सलियों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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