Friday, July 24, 2026

वट सावित्री व्रत कल, अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं रखेंगी उपवास

धार्मिक डेस्क: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ यानी वट वृक्ष की पूजा करती हैं और माता सावित्री एवं सत्यवान की कथा सुनती हैं। इस वर्ष वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा।

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अमावस्या तिथि में रखा जाएगा व्रत

पंचांग के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस बार अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और देर रात 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने तप, भक्ति और दृढ़ संकल्प से यमराज को प्रसन्न कर अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से इस व्रत को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

सुबह पूजा करना माना जाता है शुभ

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार वट सावित्री व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद वट वृक्ष की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह 10 बजकर 26 मिनट तक सौभाग्य योग में पूजा कर सकती हैं। पूजा के दौरान महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधती हैं और पति की लंबी आयु तथा सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इसी कारण इसे अक्षय वट भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस वृक्ष की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में समृद्धि आती है।

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दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व

वट सावित्री व्रत के दिन पूजा-पाठ के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को कपड़े, भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

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