रांची : झारखंड हाई कोर्ट द्वारा 72 घंटे में रिम्स परिसर से कब्जाधारियों को हटाने का आदेश दिए जाने के बाद भी, शनिवार सुबह तक परिसर से एक भी कब्जा नहीं हटा। इसके बाद जब प्रशासन ने बुलडोजर चलाने की तैयारी शुरू की, तो कई कब्जाधारी विरोध में उतर आए और चस्पा नोटिस ही फाड़ दिए।
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क्या है पूरा मामला
बुधवार (3 दिसंबर 2025) को झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स परिसर में हो रहे अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि यदि 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो पुलिस-प्रशासन बल के साथ जबरन कार्रवाई करेगा। इसके बाद प्रशासन ने रिम्स के विभिन्न हिस्सों में जैसे डॉक्टर कॉलोनी, डीआईजी ग्राउंड समेत कई स्थानों पर 145 से अधिक नोटिस चस्पा किए। नोटिस में बताया गया कि 48 घंटे के भीतर कब्जाधारियों को परिसर खाली करना है। लेकिन गुरुवार को नोटिस चस्पा होते ही कई परिवारों ने विरोध शुरू कर दिया। उनके अनुसार, वे सालों से वहीं रह रहे हैं और उनके पास पंजीकरण, म्यूटेशन और कर भुगतान के दस्तावेज भी हैं। उन्होंने कहा कि अचानक उन्हें 72 घंटे में हटाने को कहना न्यायसंगत है।
अतिक्रमणकारियों ने अपनी दलीलें पेश की
शुक्रवार को विरोध और तेज हो गया। कई परिवारों ने सामूहिक बैठक कर यह स्पष्ट किया कि वे अपने मकानों और दुकानों को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनका अतिक्रमण नहीं, बल्कि वैध कब्जा है। इसके बाद कई लोगों ने चस्पा किए नोटिस अपने हाथों से निकालकर फाड़ दिए। उनका कहना था कि यह नोटिस अवैध है और उन्हें कोर्ट-आदेश के नाम पर बेदखल करने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन की तैयारी और संभावित बुलडोजर कार्रवाई
रिम्स प्रशासन और जिला प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अगर समय सीमा तक कब्जाधारी नहीं हटे, तो वे जबरन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेंगे। कोर्ट ने भी रांची एसएसपी को पर्याप्त पुलिस बल के साथ यह जिम्मेदारी सौंपी है। शनिवार सुबह से ही प्रशासन और पुलिस बल ने परिसर की कई सीमाओं पर सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी थी। माना जा रहा है कि अगर अतिक्रमणकारियों ने जगह नहीं छोड़ी, तो बुलडोजर द्वारा पक्के/कच्चे मकानों, दुकानों और अन्य अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा।
क्या कह रहे कब्जाधारी
कब्जाधारी परिवारों ने कहा कि वे कई सालों से रिम्स के पास रह रहे हैं। उनके पास जमीन से जुड़े म्यूटेशन रिकॉर्ड, कर भुगतान और अन्य दस्तावेज हैं। उनका कहना है कि अचानक अभी-अभी बनाए गए नोटिस के आधार पर उन्हें बेदखल करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की है कि या तो उन्हें पुनर्वास की व्यवस्था दी जाए, या उन्हें वैध कब्जेदार माना जाए।
प्रशासन और कोर्ट की दलील
रिम्स प्रबंधन और जिला प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ समय में परिसर की करीब सात एकड़ जमीन पर पक्का और कच्चा निर्माण हो चुका है जिसमें मकान, दुकानें, धार्मिक स्थल और अन्य असंगठित निर्माण। स्वतंत्र निरीक्षण टीम (झालसा टीम) की रिपोर्ट में भी यह दावा पाया गया था कि ये कब्जे गैरकानूनी हैं। अदालत ने इसी आधार पर 72 घंटे में कब्जे हटाने का आदेश दिया था।
अब आगे क्या होगा?
अगर कब्जाधारी शनिवार शाम तक परिसर खाली नहीं करते, तो जिला प्रशासन और पुलिस बल बुलडोजर-सह जबरन कार्रवाई कर सकती है। मामले की अगली अदालत सुनवाई 11 दिसंबर तय की गई है। तब तक कोर्ट को एक्शन टेकन रिपोर्ट देना होगा। इससे रांची में सरकारी जमीन के उपयोग, अतिक्रमण और पुनर्वास जैसी महत्वपूर्ण बातों पर बहस फिर तेज हो सकती है। इस बीच, रिम्स परिसर और उसके आसपास का इलाका निगरानी में है। रिम्स प्रशासन-पुलिस-पुनर्वास विभाग के लिए यह सुधार और कानून का पालन सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।


