झारखंड : झारखंड और पश्चिम बंगाल में शुक्रवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक समन्वित और सबसे बड़ी हालिया कार्रवाई को अंजाम दिया। यह छापामारी अवैध कोयला खनन, तस्करी, टेंडर घोटाले और उससे जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच के तहत की गई। इस पूरे अभियान में 250 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, और कार्रवाई एक साथ 22 से अधिक परिसरों पर की गई।
Highlights:
इडी ने झारखंड के धनबाद और दुमका, तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता, उत्तर 24 परगना, आसनसोल, दुर्गापुर, हावड़ा, पुरुलिया और झाड़ग्राम में तलाशी अभियान चलाया। यह मामला कोयला तस्करी, ठेका आवंटन में अनियमितता और सरकारी कंपनियों को हुआ बड़े पैमाने का नुकसान से जुड़ा हुआ है।
झारखंड के प्रमुख कोयला कारोबारियों पर शिकंजा
कार्रवाई का फोकस झारखंड के प्रसिद्ध कोयला कारोबारी एलबी सिंह, उनके सहयोगी अनिल गोयल, संजय खेमका, और दुमका के कारोबारी अमर मंडल पर रहा। इनके 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इडी ने बताया कि ये सभी लंबे समय से कोयला परिवहन, खनन और अवैध बिक्री के नेटवर्क से जुड़े होने के शक के दायरे में थे। तलाशी के दौरान एजेंसी ने करीब दो करोड़ रुपये नकद बरामद किए। 80 लाख रुपये अमर मंडल के यहां से, बाकी नकदी अन्य परिसरों से मिली। इसके अलावा जमीन, संपत्ति, शेयर निवेश, कंपनी लेन-देन और डिजिटल भुगतान से जुड़े सैकड़ों महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2019 में इडी ने एक ECIR दर्ज किया था, जो सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित था। यह मामला कोयला खदानों से जुड़ी 452 करोड़ रुपये की परियोजना से संबंधित अनियमितताओं का था। आरोप है कि एलबी सिंह की कंपनी M/s A.T. Dev Prabha Pvt. Ltd. ने BCCL द्वारा दिए गए कार्य में भारी गड़बड़ियां कीं और कोयले की हेराफेरी के कारण सरकारी कंपनी को 13 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
जांच के दौरान इडी को कोयला तस्करी और चोरी का एक बड़ा नेटवर्क मिला, जो कोयला परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग और अवैध बिक्री में लगा हुआ था। इसी नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हुई, जिसे कई बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और निवेश के माध्यम से सफेद बनाया गया।
बंगाल में भी कई कारोबारियों के घर-दफ्तर पर छापेमारी
पश्चिम बंगाल में जिन लोगों के परिसरों पर छापेमारी की गई, उनमें से नरेंद्र खड़का, युधिष्ठिर घोष, कृष्ण मुरारी कयाल, चिन्मयी मंडल, राजकिशोर यादव, गोपाल झुनझुनवाला, परवेज आलम है। इन सभी पर कोयला ठेकों, परिवहन और अवैध सप्लाई चैन से जुड़े होने का संदेह है।
छापेमारी कोलकाता के अलीपुर, तपसिया और न्यू अलीपुर, तथा सॉल्टलेक के सेक्टर दो व ए के ब्लॉक, EM बाइपास, पुरुलिया, झाड़ग्राम और हावड़ा के सलप मोड़ तक हुई। एजेंसी को शक है कि इन्हीं व्यक्तियों के नेटवर्क के जरिए अवैध कमाई को कई खातों और कंपनियों में भेजा जाता था।
डिजिटल सबूतों की जांच
अमर मंडल के यहां से जमीन घोटालों से जुड़ी कई फाइलें मिली हैं। वहीं, अनिल गोयल के ठिकाने से ऐसा डिजिटल डेटा मिला है जो अवैध लेन-देन की गुत्थियों को सुलझाने में अहम साबित हो सकता है। इडी अब इन डाटा, कंप्यूटर फाइलों, मोबाइल रिकॉर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक लेजर की विस्तृत जांच कर रही है। सूत्र के अनुसार, कई लेन-देन को वैध दिखाने के लिए सलाहकारों और वकीलों की मदद ली गई थी। इसलिए उनके ठिकानों पर भी दस्तावेज इकट्ठा किए गए हैं।
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक यह केवल अवैध कोयला चोरी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक बहुस्तरीय वित्तीय अपराध है। कोयला तस्करी के कारण सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच में सामने आया है कि कोयला ट्रकों की फर्जी एंट्री करवाई जाती थी। कम मात्रा दिखाकर अधिक कोयला बेचा जाता था। कई जगहों पर रात में अवैध खनन होता था। राशि को फर्जी कंपनियों में घुमाकर सफेद किया जाता था। इडी को उम्मीद है कि दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद इस नेटवर्क की कई और परतें खुलेंगी और कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।


