कर्नाटक हाई कोर्ट ने जाति-आधारित सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि सर्वे जारी रह सकता है, लेकिन इसमें कुछ शर्तें माननी होंगी। पिछड़ा वर्ग आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सर्वे से जुड़ी सारी जानकारी गोपनीय रखी जाए और इसे सार्वजनिक न किया जाए। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि सर्वे में भाग लेना पूरी तरह स्वैच्छिक होगा, यानी किसी भी नागरिक पर दबाव नहीं डाला जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति जानकारी देने से मना करता है तो गणनाकर्ता उसे मजबूर नहीं कर सकता। केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि यह काम असल में जनगणना जैसा है, जो उनके अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। इस सर्वे के खिलाफ वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों के सदस्य, ब्राह्मण महासभा और कुछ सामाजिक संगठनों ने याचिकाएं दाखिल की हैं।


