Sunday, September 27, 2026

NIA कोर्ट में लंबित मामलों को लेकर झारखंड समेत 17 राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आतंकवादी मामलों की सुनवाई में देरी और लंबित मामलों को लेकर 17 राज्यों एवं केंद्रशासित क्षेत्रों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उन राज्यों/क्षेत्रों को जारी किया गया है जहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के तहत 10 या उससे अधिक मामले लंबित सुनवाई के लिए हैं। कोर्ट ने इन राज्यों से विस्तृत प्रतिक्रिया और स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

कौन-कौन से राज्य/क्षेत्र शामिल हैं?

नोटिस में शामिल राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में झारखंड, दिल्ली, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, पंजाब, तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना शामिल हैं। इन स्थानों में NIA के 10 से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं। दिल्ली में सबसे अधिक 59 मामले लंबित हैं, जबकि मणिपुर में 10 मामले हैं। झारखंड में भी पर्याप्त संख्या में मामले अदालतों में विचाराधीन हैं, इसलिए इस सूची में राज्य का नाम शामिल हुआ है।

क्यों जारी किया नोटिस?

न्यायालय को यह जानकारी दी गई कि न केवल इन मामलों की संख्या अधिक है, बल्कि विशेष NIA न्यायालयों में सुनवाई की क्रियाशीलता और तेजी भी काफी कम है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर इन राज्यों को नोटिस जारी किया है ताकि वे विशेष NIA अदालतों के गठन तथा सुनवाई की स्थिति और देरी के कारणों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

विशेष NIA कोर्ट की संभावित स्थापना

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा है कि इन राज्यों में विशेष NIA अदालतें बनाने के प्रस्ताव पर काम चल रहा है, ताकि NIA से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज़ी से और नियमित रूप से हो सके। इन विशेष अदालतों के लिए केंद्र आर्थिक सहायता भी दे सकता है, जिसमें लगभग प्रत्येक अदालत के लिए वित्तीय अनुदान का प्रावधान शामिल है।

अदालत का निर्देश

न्यायालय ने इन 17 राज्यों/क्षेत्रों के मुख्य सचिवों और अटॉर्नी जनरल के समक्ष इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत करने को कहा है। अगली सुनवाई में इन राज्यों की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लिया जाएगा। अदालत ने कहा है कि लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाना न्याय के हित में अत्यंत आवश्यक है।

लंबित मामलों से जुड़ी चुनौतियां

विशेष NIA अदालतों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई न थमे और गवाहों के संरक्षण के साथ न्याय समय पर मिले। लंबित मामलों की संख्या अगर अधिक रहती है, तो न केवल मामलों की जांच प्रभावित होती है, बल्कि न्याय की देरी के कारण साक्ष्य कमजोर हो सकते हैं और आरोपी पक्ष राहत पाने के लिए देरी का हवाला दे सकता है, जिससे देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर भी प्रश्न उठ सकते हैं।

अब क्या होगा?

अगली सुनवाई में ये देखा जाएगा कि संबंधित राज्यों ने अदालत के नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया दी है और किस सीमा तक विशेष NIA कोर्ट के गठन तथा लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए कदम उठाए हैं। अदालत ने इस मुद्दे को दो हफ्तों बाद फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

spot_img

एयर नाऊ स्पेशल

कौन हैं सुभाष चंद्र गर्ग? GDP के आंकड़ों से...

Rohit Anil Tripathi कौन हैं सुभाष चंद्र गर्ग? जो कभी कहते हैं कि देश की जीडीपी के आंकड़े सही नहीं हैं, कभी अपनी किताब में...
- Advertisement -spot_img

सोशल मीडिया

25,000FansLike
40,000FollowersFollow
500FollowersFollow
113,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

ट्रेंडिंग ख़बर