Wednesday, October 7, 2026

मोबाइल और लैपटॉप से आंखों पर असर, बचाव के 7 आसान तरीके

Lifestyle Desk: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. पढ़ाई, ऑफिस का काम, ऑनलाइन मीटिंग, सोशल मीडिया और मनोरंजन के लिए लोग रोज कई घंटे स्क्रीन देखते हैं. ऐसे में लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना आंखों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है. अगर आप भी दिन का बड़ा हिस्सा मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर पर बिताते हैं, तो आंखों की सेहत को लेकर सावधान रहना जरूरी है.

लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन, जलन, पानी आना, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हालांकि, काम और पढ़ाई की वजह से स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है. ऐसे में कुछ आसान आदतों को अपनाकर आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम किया जा सकता है. विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर जानते हैं कि मोबाइल और लैपटॉप से आंखों पर क्या असर पड़ता है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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मोबाइल और लैपटॉप का आंखों पर असर 

लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन देखने से डिजिटल आंखों की थकान की समस्या हो सकती है. इसे आम भाषा में स्क्रीन की वजह से होने वाली आंखों की थकान भी कहा जा सकता है. इस दौरान आंखों में भारीपन, थकान, सूखापन, जलन और पानी आने जैसी शिकायत हो सकती है. कुछ लोगों को लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद धुंधला दिखाई देने या सिरदर्द की समस्या भी महसूस हो सकती है. स्क्रीन पर लगातार एक ही जगह देखते रहने से आंखों को बार-बार फोकस करने की जरूरत पड़ती है. लंबे समय तक ऐसा होने पर आंखों में थकान महसूस हो सकती है.

स्क्रीन देखते समय पलकें कम झपकाना 

मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करते समय लोग सामान्य स्थिति की तुलना में कम पलकें झपका सकते हैं. इसका असर आंखों की नमी पर पड़ सकता है और आंखों में सूखापन या जलन महसूस हो सकती है. खासकर तब परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है, जब कोई व्यक्ति बिना ब्रेक के लंबे समय तक स्क्रीन देखता रहे. इसलिए सिर्फ स्क्रीन की रोशनी ही नहीं, बल्कि लगातार स्क्रीन देखने की आदत पर भी ध्यान देना जरूरी है. स्क्रीन से नजर हटाकर कुछ समय के लिए दूर देखना और सामान्य तरीके से पलकें झपकाते रहना आंखों को आराम देने में मदद कर सकता है.

आंखों की सेहत के लिए अपनाएं 7 आसान तरीके

1. 20-20-20 नियम अपनाएं

स्क्रीन पर लगातार नजर रखने के बजाय 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता है. इसके तहत हर 20 मिनट में करीब 20 सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर लगभग 20 फीट दूर किसी चीज को देखने की कोशिश करें.इससे आंखों को लगातार पास की स्क्रीन पर फोकस करने से कुछ समय का ब्रेक मिलता है.

2. मोबाइल और लैपटॉप से दूरी रखें

मोबाइल को आंखों के बहुत पास रखकर देखने से बचें. लैपटॉप और कंप्यूटर की स्क्रीन भी ऐसी दूरी पर रखें, जहां आपको टेक्स्ट पढ़ने के लिए आंखों पर ज्यादा जोर न डालना पड़े. स्क्रीन की स्थिति भी आरामदायक होनी चाहिए. अगर आपको बार-बार आंखें सिकोड़कर स्क्रीन देखनी पड़ रही है, तो स्क्रीन की दूरी, टेक्स्ट साइज या ब्राइटनेस को एडजस्ट करना बेहतर है.

3. लगातार स्क्रीन देखने से बचें

काम या पढ़ाई जरूरी है, लेकिन लगातार कई घंटे स्क्रीन देखने की आदत से बचना चाहिए. बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें और कुछ समय के लिए स्क्रीन से नजर हटा लें. अगर लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करना पड़ता है, तो काम के बीच कुछ देर उठकर चलना और दूर देखना भी अच्छी आदत हो सकती है.

4. स्क्रीन की रोशनी सही रखें

बहुत ज्यादा तेज या बहुत कम रोशनी वाली स्क्रीन आंखों के लिए असहज हो सकती है. कमरे की रोशनी के हिसाब से स्क्रीन की ब्राइटनेस को एडजस्ट करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि स्क्रीन पर आसपास की लाइट या खिड़की की सीधी चमक न पड़ रही हो. अनावश्यक प्रतिबिंब से स्क्रीन देखने में परेशानी बढ़ सकती है.

5. पलकें नियमित रूप से झपकाते रहें

स्क्रीन देखते समय पलकें झपकाना कम हो सकता है. इससे आंखों में सूखापन और जलन महसूस हो सकती है. इसलिए मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करते समय समय-समय पर सामान्य तरीके से पलकें झपकाते रहें. आंखों में लगातार सूखापन महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.

6. अंधेरे में मोबाइल देखने से बचें

पूरी तरह अंधेरे कमरे में तेज रोशनी वाली मोबाइल स्क्रीन देखने से आंखों में असहजता महसूस हो सकती है. इसलिए मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते समय आसपास पर्याप्त रोशनी रखना बेहतर है. खासकर रात में बिस्तर पर लेटकर लंबे समय तक मोबाइल देखने की आदत से बचने की कोशिश करें. कमरे और स्क्रीन की रोशनी के बीच बहुत ज्यादा अंतर न हो, इसका ध्यान रखें.

7. आंखों की परेशानी को नजरअंदाज न करें

अगर आंखों में लगातार दर्द, जलन या सूखापन रहता है, बार-बार सिरदर्द होता है या धुंधला दिखाई देता है, तो इसे सिर्फ स्क्रीन की थकान मानकर नजरअंदाज न करें. ऐसी स्थिति में नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की जांच करवाना बेहतर है. लगातार नजर में बदलाव या देखने में परेशानी होने पर इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं.

मोबाइल देखने से आंखों की रोशनी कम 

यह समझना जरूरी है कि स्क्रीन देखने के बाद होने वाली आंखों की थकान और आंखों की स्थायी रोशनी कम होना एक ही बात नहीं है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन, जलन और कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानी हो सकती है.

लेकिन अगर किसी व्यक्ति को नजर में लगातार बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसके पीछे दूसरे कारण भी हो सकते हैं. इसलिए सिर्फ मोबाइल या लैपटॉप को इसका कारण मानकर खुद से किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं है. लगातार समस्या रहने पर आंखों की जांच करवाना जरूरी है.

स्क्रीन टाइम कम करने के साथ इन बातों का रखें ध्यान

आज के समय में मोबाइल और लैपटॉप से पूरी तरह दूरी बनाना ज्यादातर लोगों के लिए आसान नहीं है. ऑफिस, पढ़ाई और दूसरे जरूरी कामों के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल करना पड़ता है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि स्क्रीन टाइम को संतुलित रखा जाए.

लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना, सही दूरी बनाए रखना, कमरे में पर्याप्त रोशनी रखना और पलकें झपकाते रहना जैसी छोटी आदतें आंखों के तनाव को कम करने में मदद कर सकती हैं. अगर आंखों में लगातार परेशानी बनी हुई है, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा बेहतर है.

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