Monday, October 5, 2026

Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी के साथ रहीं 8 महिलाएं, किसी ने गुरु माना तो कोई बनी डॉक्टर, आखिरी वक्त तक रहीं साथ

महात्मा गांधी की तस्वीरें आपने बहुत देखी होंगी। चश्मा, लाठी, धोती और उनके आसपास लोगों की भीड़। लेकिन इस भीड़ में कुछ चेहरे ऐसे थे, जो Gandhi की जिंदगी में सिर्फ किसी सभा या आंदोलन की वजह से नहीं थे। कुछ महिलाएं उनके साथ सालों तक रहीं। किसी ने उन्हें अपना गुरु माना, किसी ने उनके साथ आजादी की लड़ाई लड़ी, कोई उनकी डॉक्टर बनी, किसी ने उनके साथ गांवों में सफर किया और कुछ महिलाएं गांधी के आखिरी वक्त तक उनके साथ थीं।

Gandhi Jayanti के मौके पर जानते हैं उन आठ महिलाओं की कहानी, जिनका जीवन किसी न किसी रूप में महात्मा गांधी से जुड़ा रहा।

Gandhi के करीब कैसे आईं मेडेलीन स्लेड, ब्रिटेन से भारत तक का सफर

इन महिलाओं में पहला नाम मेडेलीन स्लेड का है। 1892 में ब्रिटेन में जन्मी मेडेलीन ब्रिटिश नौसेना के एडमिरल सर एडमंड स्लेड की बेटी थीं। संपन्न और अनुशासित परिवार में पली-बढ़ीं मेडेलीन को संगीत से खास लगाव था। खासकर जर्मन संगीतकार बीथोवेन से।

संगीत के रास्ते उनकी मुलाकात फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां से हुई। रोमां रोलां Gandhi के बारे में लिख चुके थे। इसके बाद मेडेलीन ने उनके विचारों के बारे में पढ़ना शुरू किया और धीरे-धीरे उनसे प्रभावित होती चली गईं।

असर इतना हुआ कि उन्होंने अपनी जिंदगी का तरीका ही बदल दिया। शराब छोड़ दी, शाकाहारी बन गईं, खेती सीखने लगीं और गांधी का अखबार ‘यंग इंडिया’ पढ़ने लगीं।

अक्टूबर 1925 में वह भारत पहुंचीं। अहमदाबाद में Gandhi से उनकी पहली मुलाकात हुई। Gandhi ने उन्हें बेटी कहा। इसके बाद मेडेलीन का नाम मीराबेन पड़ा। वह Gandhi के आश्रम में रहने लगीं और उनके काम में शामिल हो गईं।ब्रिटिश परिवार में जन्मी एक महिला का भारत आकर Gandhi के साथ रहना उस दौर की एक असाधारण घटना थी।

Gandhi से जुड़ी निला क्रैम कुक की कहानी

Gandhi से जुड़ी दूसरी महिला थीं निला क्रैम कुक। निला का जन्म अमेरिका में हुआ था। वह भारत आईं और धार्मिक जीवन से जुड़ीं।1932 में उन्होंने Gandhi को एक पत्र लिखा। इसके बाद दोनों के बीच पत्राचार शुरू हुआ। अगले साल निला ने यरवदा जेल में उनसे मुलाकात की।

Gandhi ने उन्हें साबरमती आश्रम भेजा। लेकिन आश्रम का अनुशासन निला के लिए आसान नहीं था। कुछ समय बाद वह आश्रम छोड़कर चली गईं। बाद में वृंदावन में मिलीं और फिर उन्हें अमेरिका भेज दिया गया।निला की कहानी गांधी के प्रभाव और उनके आश्रम के अनुशासन के बीच का फर्क भी दिखाती है।

Gandhi और सरला देवी चौधरानी का निजी रिश्ता

सरला देवी चौधरानी का नाम Gandhi के जीवन के एक अलग और निजी अध्याय से जुड़ा है। सरला देवी रविंद्रनाथ टैगोर के परिवार से थीं। वह पढ़ी-लिखी थीं और संगीत, लेखन तथा कई भाषाओं में उनकी रुचि थी।

गांधी जब लाहौर गए तो सरला देवी के घर ठहरे। उनके पति रामभुज दत्त चौधरी उस समय जेल में थे। इसी दौरान उनके और सरला देवी के बीच नजदीकी बढ़ी।

बापू ने उन्हें अपनी आध्यात्मिक पत्नी तक कहा। दोनों ने खादी के प्रचार के लिए साथ यात्राएं कीं। Gandhi के लिए यह रिश्ता इतना महत्वपूर्ण हो गया कि बाद में उन्होंने माना कि इसकी वजह से उनका वैवाहिक जीवन भी मुश्किल स्थिति में पहुंच गया था। कुछ समय बाद उन्होंने सरला देवी से दूरी बना ली।

दोस्त और राजनीतिक साथी थीं सरोजिनी नायडू

Gandhi की जिंदगी में सरोजिनी नायडू की भूमिका अलग थी। सरोजिनी नायडू कवयित्री थीं, स्वतंत्रता सेनानी थीं और कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनीं।

Gandhi और सरोजिनी नायडू की पहली मुलाकात लंदन में हुई थी। सरोजिनी ने पहली बार गांधी को देखा तो वह जमीन पर बैठकर खाना खा रहे थे।उनका सादा पहनावा और सहज अंदाज देखकर सरोजिनी हंस पड़ीं।

गांधी ने भी मजाक में उनसे पूछा कि आप जरूर मिसेज नायडू होंगी।

पहली मुलाकात का यही अंदाज आगे चलकर दोस्ती में बदल गया। दोनों स्वतंत्रता आंदोलन में साथ काम करते रहे। गांधी की गिरफ्तारी के बाद नमक सत्याग्रह की अगुवाई करने वालों में सरोजिनी नायडू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 स्वतंत्रता आंदोलन में उतरीं राजकुमारी अमृत कौर

पांचवां नाम राजकुमारी अमृत कौर का है। कपूरथला के शाही परिवार में जन्मी अमृत कौर की पढ़ाई इंग्लैंड में हुई थी।उनके पास आराम की जिंदगी जीने के तमाम साधन थे, लेकिन उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का रास्ता चुना। 1934 में Gandhi से मुलाकात के बाद दोनों के बीच लगातार पत्राचार हुआ।

अमृत कौर नमक सत्याग्रह में शामिल हुईं और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल भी गईं।आजादी के बाद वह देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनीं। आधुनिक स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण में उनकी भूमिका रही और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स की स्थापना से भी उनका नाम जुड़ा है।

निजी डॉक्टर बनीं सुशीला नय्यर

Gandhi के करीब रहने वाली छठी महिला थीं डॉक्टर सुशीला नय्यर। सुशीला डॉक्टर थीं और आगे चलकर Gandhi की निजी डॉक्टर बनीं।

वह लंबे समय तक Gandhi के साथ रहीं। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुईं। पुणे में कस्तूरबा Gandhi के आखिरी दिनों में भी वह उनके साथ थीं।

सुशीला नय्यर का नाम गांधी के ब्रह्मचर्य से जुड़े प्रयोगों के संदर्भ में भी आता है। Gandhi के जीवन का यह हिस्सा आज भी इतिहासकारों के बीच चर्चा का विषय है।

इसे समझने के लिए Gandhi के लेखन, सुशीला नय्यर के संस्मरण और दूसरे ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखना पड़ता है।

Gandhi के आखिरी दिनों में साथ थीं आभा गांधी

सातवां नाम आभा गांधी का है। आभा बंगाली परिवार से थीं और उनकी शादी गांधी के परपोते कनु गांधी से हुई थी।

वह Gandhi की प्रार्थना सभाओं में भजन गाती थीं। नोआखाली में जब सांप्रदायिक हिंसा के बीच वे गांव-गांव जाकर लोगों से शांति की अपील कर रहे थे, तब आभा उनके साथ थीं। उनकी उम्र बढ़ चुकी थी और शरीर कमजोर था। आभा और मनु उन्हें चलने में सहारा देती थीं।

गांधी के आखिरी दिन भी आभा उनके साथ थीं। 30 जनवरी 1948 को वे प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे। आभा उनके साथ थीं। इसी दौरान नाथूराम गोडसे ने महात्मा की हत्या कर दी।

Gandhi की पोती कही जाती थीं मनु गांधी

गांधी के साथ मौजूद दूसरी महिला थीं मनु गांधी। मनु गांधी उनकी दूर की रिश्तेदार थीं और वे उन्हें अपनी पोती कहते थे।

वह बहुत कम उम्र में गांधी के पास आ गई थीं। नोआखाली के दिनों में उन्होंने गांधी के साथ रहकर काम किया। कस्तूरबा के आखिरी दिनों में भी मनु ने उनकी सेवा की।

गांधी के अंतिम वर्षों को समझने के लिए मनु की डायरी को महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इसमें गांधी की दिनचर्या, उनके काम और उनके आसपास हो रही घटनाओं की जानकारी मिलती है।

30 जनवरी 1948 की शाम मनु भी Gandhi के साथ प्रार्थना सभा की ओर जा रही थीं।

Gandhi के आसपास मौजूद इन आठ महिलाओं की कहानी क्या बताती है?

बापू के करीब रहीं इन आठ महिलाओं की जिंदगी को देखें तो हर कहानी अलग है। मीराबेन उनके विचारों से प्रभावित होकर ब्रिटेन से भारत आईं। निला उनके संपर्क में आईं, लेकिन आश्रम की जिंदगी में लंबे समय तक नहीं रह सकीं।

सरला देवी के साथ  उनका रिश्ता निजी और जटिल रहा। सरोजिनी नायडू उनकी राजनीतिक साथी और दोस्त बनीं। अमृत कौर ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और आजाद भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में भी काम किया।

सुशीला नय्यर डॉक्टर के तौर पर गांधी के बेहद करीब रहीं। आभा और मनु गांधी के जीवन के आखिरी वर्षों में उनके साथ रहीं।

राष्ट्रपिता की तस्वीरों में अक्सर इन चेहरों को उनके आसपास देखा जा सकता है। लेकिन हर चेहरे के पीछे एक अलग कहानी है। कहीं राजनीति है, कहीं सेवा, कहीं दोस्ती, कहीं गुरु और शिष्य का रिश्ता और कहीं उनके निजी जीवन की जटिलताएं।

बापू को सिर्फ उनके आंदोलनों और भाषणों से समझना हो तो तस्वीर अधूरी रह जाती है। उनके आसपास मौजूद लोगों की जिंदगी को देखने पर उस दौर का एक अलग हिस्सा सामने आता है। इन आठ महिलाओं की कहानियां उसी हिस्से को समझने का एक रास्ता देती हैं।

ये भी पढ़ें: आज भी लोगों को याद है बापू का सत्य और अहिंसा का रास्ता

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एयर नाऊ स्पेशल

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