News Desk: अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है. 75 साल के नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर की सुबह गोवा में निधन हो गया. रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था और अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. नाना पाटेकर के निधन के बाद एक बार फिर CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. आखिर कार्डियक अरेस्ट के समय CPR क्यों किया जाता है. यह शरीर में क्या करता है और इसे सही समय पर देना कितना जरूरी है. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
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Cardiac Arrest क्या है
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Cardiac Arrest और Heart Attack एक ही चीज नहीं हैं. कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक सही तरीके से धड़कना बंद कर देता है. इससे शरीर और दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति अचानक गिर सकता है. वह आवाज देने या हिलाने पर जवाब नहीं देता. उसकी सामान्य सांस भी रुक सकती है या सिर्फ हांफने जैसी सांस दिखाई दे सकती है.
यह बेहद गंभीर मेडिकल इमरजेंसी होती है. वहीं Heart Attack में आमतौर पर दिल तक जाने वाले खून के प्रवाह में रुकावट आती है. Heart Attack कभी-कभी Cardiac Arrest का कारण भी बन सकता है, लेकिन दोनों एक ही स्थिति नहीं हैं.
Cardiac Arrest में CPR जरूरी
अब सवाल आता है कि जब दिल ने काम करना बंद कर दिया, तो CPR आखिर करता क्या है. CPR का मकसद तुरंत दिल को सामान्य तरीके से चालू करना नहीं होता. छाती पर दबाव देने से शरीर में कुछ हद तक खून का प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलती है. इससे दिमाग और दूसरे जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन वाला खून पहुंचाने की कोशिश की जाती है, जब तक AED या मेडिकल टीम आगे का इलाज शुरू न कर दे.
इसी वजह से CPR जितनी जल्दी शुरू हो, उतना बेहतर होता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक अचानक Cardiac Arrest होने पर आसपास मौजूद व्यक्ति को तुरंत मदद बुलानी चाहिए और CPR शुरू करनी चाहिए. यानी ऐसी स्थिति में एंबुलेंस का इंतजार करके समय गंवाना सही नहीं है. अगर व्यक्ति सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है और जवाब नहीं दे रहा है, तो तुरंत इमरजेंसी मदद बुलाकर CPR शुरू करना चाहिए.
CPR देने का सही तरीका
अगर कोई वयस्क व्यक्ति अचानक गिर जाए और प्रतिक्रिया न दे, तो सबसे पहले उसकी सुरक्षा और स्थिति देखें. आवाज देकर और कंधे पर हल्का टैप करके प्रतिक्रिया जांचें. सामान्य सांस नहीं आ रही हो या सिर्फ हांफने जैसी सांस हो, तो तुरंत इमरजेंसी मदद के लिए कॉल करें. भारत में मेडिकल इमरजेंसी समेत दूसरी आपात स्थितियों के लिए 112 पर कॉल किया जा सकता है. इसके बाद व्यक्ति को पीठ के बल किसी सख्त और समतल जगह पर रखें.
अपने हाथ की हथेली का निचला हिस्सा छाती के बीच में रखें. दूसरा हाथ उसके ऊपर रखें और उंगलियों को आपस में फंसा लें. अब हाथों को सीधा रखते हुए छाती पर तेज और लगातार दबाव दें. वयस्क व्यक्ति में दबाव की गति करीब 100 से 120 बार प्रति मिनट होनी चाहिए और गहराई करीब 5 से 6 सेंटीमीटर रखी जाती है. हर दबाव के बाद छाती को पूरी तरह ऊपर आने दें.
अगर CPR की ट्रेनिंग नहीं ली है, तो आम लोगों के लिए Hands-Only CPR यानी सिर्फ छाती पर दबाव देना एक विकल्प है. अगर किसी व्यक्ति को CPR की सही ट्रेनिंग मिली है, तो वह जरूरत के अनुसार सांस देने वाली CPR भी कर सकता है.
AED मिलने पर क्या करें
CPR के साथ AED यानी Automated External Defibrillator भी काफी अहम हो सकता है. यह एक ऐसी मशीन है जो दिल की धड़कन की जांच करती है और जरूरत पड़ने पर शॉक देने के निर्देश देती है. अगर आसपास AED मौजूद है, तो किसी दूसरे व्यक्ति को उसे लाने के लिए कहें. मशीन को ऑन करके उसके निर्देशों का पालन करें. आम लोगों के लिए भी AED इस्तेमाल करना संभव है, क्योंकि मशीन खुद आगे की प्रक्रिया के बारे में निर्देश देती है.
इस दौरान CPR को बिना जरूरत रोकना नहीं चाहिए. मेडिकल टीम के पहुंचने, व्यक्ति के सामान्य रूप से सांस लेने या AED के निर्देश के अनुसार प्रक्रिया बदलने तक मदद जारी रखनी चाहिए.
नाना पाटेकर के मामले से समझें
नाना पाटेकर को अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने लंबे समय तक उन्हें revive करने की कोशिश की. रिपोर्टों के मुताबिक करीब 45 मिनट तक cardiac massage दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. इससे एक बात साफ समझ आती है कि CPR जान बचाने की कोशिश का अहम हिस्सा है, लेकिन यह किसी की जान बचने की गारंटी नहीं है. Cardiac Arrest के पीछे की वजह, कितनी जल्दी मदद शुरू हुई, दिल की rhythm और मेडिकल इलाज कितनी जल्दी मिला, जैसे कई factors नतीजे पर असर डालते हैं.
इसलिए किसी व्यक्ति को अचानक गिरते हुए देखें और वह सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो घबराने के बजाय तुरंत मदद बुलाना और सही तरीके से CPR शुरू करना ज्यादा जरूरी है. समय पर उठाया गया एक कदम किसी की जान बचाने में अहम साबित हो सकता है.


