Health Desk: दिल की बीमारी का नाम आते ही ज्यादातर लोग हार्ट अटैक के बारे में सोचते हैं. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक एक ऐसी स्थिति भी है, जो उससे भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है. इसे कार्डियोजेनिक शॉक कहा जाता है. यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल अचानक शरीर की जरूरत के हिसाब से खून पंप करना बंद कर देता है. यह अक्सर हार्ट अटैक के बाद की सबसे गंभीर स्थिति होती है. जब दिल की मांसपेशियां ज्यादा डैमेज हो जाती हैं, तो वे खून को आगे नहीं बढ़ा पातीं. इसका सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है, जो तेजी से गिर जाता है. इसके बाद शरीर के जरूरी अंगों तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. यही वजह है कि किडनी, दिमाग और दूसरे अंग धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगते हैं.
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सिर्फ हार्ट अटैक ही वजह नहीं
डॉक्टर बताते हैं कि हर केस में हार्ट अटैक ही कारण नहीं होता. कई बार हार्ट वाल्व की गंभीर समस्या, मायोकार्डिटिस या पहले से चल रहा हार्ट फेलियर भी इसकी वजह बन सकता है. यानी अगर दिल पहले से कमजोर है, तो खतरा और बढ़ जाता है. यहीं सबसे बड़ी गलती होती है. लोग इसे थकान या कमजोरी समझकर टाल देते हैं. लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. जैसे सीने में तेज दर्द या दबाव, अचानक पसीना आना, सांस लेने में दिक्कत, नब्ज का तेज या बहुत कमजोर होना, चक्कर आना या बेहोश हो जाना. ये सभी शरीर के अलर्ट सिग्नल हैं.
इलाज में देरी से खतरा
इस स्थिति में समय सबसे बड़ा फैक्टर होता है. डॉक्टर इसे ‘गोल्डन विंडो’ कहते हैं. यानी शुरुआत के कुछ मिनट या घंटे, जब इलाज शुरू हो जाए तो जान बच सकती है. अस्पताल में तुरंत ईसीजी, इको जैसी जांच होती है. जरूरत पड़ने पर दवाएं, मशीनों का सपोर्ट या इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी की जाती है. हर सेकंड यहां मायने रखता है.
आजकल खराब लाइफस्टाइल की वजह से दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. चिंता की बात यह है कि युवा भी अब इससे अछूते नहीं हैं. ऐसे में जरूरी है कि लोग इसके लक्षण पहचानें और देर न करें. अगर आसपास किसी को ऐसे संकेत दिखें, तो तुरंत अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सही कदम है.


