रांची: झारखंड की सियासत में इन दिनों कांग्रेस के भीतर सुलगती चिंगारी अब शोला बनकर बाहर आ रही है. पार्टी की स्थापित लकीर से जुदा अंदाज और तल्ख बयानों के चलते अनुशासन के कटघरे में खड़े पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने शुक्रवार को रांची स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ऐसी बात कही कि सियासी गलियारों की हवा ही बदल गई. अनुशासन समिति के सामने पेशी और शोकॉज नोटिस के दबाव के बावजूद उनके तेवर में नरमी नहीं आई. उन्होंने दो टूक अंदाज में साफ कर दिया कि जनता के हक और इंसाफ की लड़ाई में वह किसी भी कीमत पर झुकेंगे नहीं और अपने बयानों पर माफी मांगने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.
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रांची पहुंचे योगेंद्र साव ने अनुशासन समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए बेहद बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड की जमीनी हकीकत से हाईकमान को रू-ब-रू कराना उनका फर्ज था, कोई बगावत नहीं. उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि यदि उनके द्वारा उठाए गए एक भी आरोप गलत साबित हो जाएं, तो वह सियासत को हमेशा के लिए अलविदा कहने को तैयार हैं. पार्टी का हाईकमान जो भी फैसला ले, वह उन्हें सिर-आंखों पर मंजूर होगा, लेकिन कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर उनकी जुबान पर ताला नहीं लग सकता.
बयानों के इस सियासी बवंडर के पीछे असल सुलगती आग प्रशासनिक महकमे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर है. योगेंद्र साव ने गंभीर इल्जाम लगाते हुए कहा कि हुकूमत में हिस्सेदारी के बावजूद आज जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की कोई सुधि लेने वाला नहीं है.सीओ, बीडीओ से लेकर थाने के दरोगा, एसपी और डीसी तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं की फरियाद को अनसुना कर रहे हैं.जनता के बीच काम करने वाले जमीन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को जब हक नहीं मिलेगा, तो आवाज बुलंद करना स्वाभाविक है.
बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र के सुलगते मुद्दों को उठाते हुए उन्होंने सरकार और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला परियोजनाओं के नाम पर गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं और विरोध करने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं तथा आम जनता पर जुल्म की इंतहा करते हुए पुलिसिया कार्रवाई का चाबुक चलाया जा रहा है. केरेडारी, चट्टीबरियातू और बड़कागांव की खदानों के इर्द-गिर्द विस्थापितों के हक, मुआवजे और रोजगार की सुध न लिए जाने पर उन्होंने तीखा रोष व्यक्त किया.


