भोजपुर (बिहार): बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस महकमे के भीतर ही बड़ा हड़कंप मच गया है। जिस पुलिस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, अब उसी के बड़े अधिकारियों पर हत्या जैसे गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। भोजपुर के एसपी राज ने मंगलवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि शाहपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी , शाहपुर थाने के थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। यह पूरी कार्रवाई मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी के लिखित आवेदन के आधार पर की गई है।
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मां का आरोप: हथियार फेंक दिया था, फिर भी मार दी 5 गोलियां
भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे अपने आवेदन में जो दावे किए हैं, वे बेहद झकझोरने वाले हैं। उन्होंने सीधे तौर पर इसे फर्जी एनकाउंटर का रूप देने का आरोप लगाया है। आवेदन के मुताबिक भरत तिवारी इलाके में बाढ़ विस्थापितों और गरीबों की समस्याओं को लेकर लगातार स्थानीय प्रशासन से संघर्ष कर रहे थे और जनता की आवाज उठा रहे थे। इसी वजह से वे पुलिस की आंखों में खटक रहे थे। वहीं घटना वाले दिन जब पुलिस बल उनके घर पहुंचा, तो भरत तिवारी ने बकायदा फेसबुक लाइव शुरू किया। मां का दावा है कि लाइव वीडियो के दौरान ही भरत ने अपने हाथ में मौजूद हथियार को जमीन पर फेंक दिया था और खुद को पूरी तरह पुलिस के हवाले कर दिया था। लेकिन परिजनों का आरोप है कि निहत्थे होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने भरत को दबोचकर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद जगदीशपुर के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के आदेश पर उन पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। भरत तिवारी को करीब 5 गोलियां मारी गईं।
एनकाउंटर के बाद घंटों तक छुपाकर रखी मौत की खबर
आशा देवी ने पुलिस की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि एनकाउंटर के बाद पुलिस लहूलुहान हालत में भरत तिवारी को अपने साथ ले गई। परिवार के लोग मिन्नतें करते रहे, लेकिन कई घंटों तक उन्हें बेटे की स्थिति के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी गई। आखिरकार, देर शाम परिजनों को सूचना दी गई कि भरत तिवारी की मौत हो चुकी है, जिसके बाद से पूरे परिवार और गांव में कोहराम मचा हुआ है।
क्या अब शिकंजे में आएंगे वर्दीवाले?
शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब इस पूरे एनकाउंटर केस में एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ आ गया है। इस कदम के बाद बिहार पुलिस बैकफुट पर नजर आ रही है। अगर मां के दावों और फेसबुक लाइव के सबूतों में सच्चाई पाई जाती है, तो आरोपी पुलिस अधिकारियों का जेल जाना तय माना जा रहा है। फिलहाल, मानवाधिकार संगठन और स्थानीय जनता भी इस मामले पर नजरें गड़ाए हुए हैं। देखना यह होगा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए क्या इस केस को सीआईडी या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाता है या नहीं?
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