बेंगलुरु: कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ा जिले से स्वाइन फ्लू से जुड़ी दुखद खबर आई है। यहां एक व्यक्ति की मंगलुरु के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मरीज को 10 जून को बुखार हुआ था। क्लीनिक की दवा से फायदा नहीं हुआ तो उसे सिरसी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। सांस लेने में परेशानी बढ़ने पर मंगलुरु रेफर किया गया, जहां जांच में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। संक्रमण रोकने के लिए मृतक के परिवार और संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू कर दी गई है। उन्हें मास्क पहनने की सलाह दी गई है।
Highlights:
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स्वाइन फ्लू कैसे फैलता है?
डॉ. के मुताबिक स्वाइन फ्लू इंफ्लूएंजा A वायरस H1N1 से होता है। ये सांस से जुड़ी संक्रामक बीमारी है जो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करती है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने से हवा में वायरस वाली बूंदें फैल जाती हैं। उन्हें सांस लेने से दूसरे को संक्रमण हो जाता है। दूषित सतह छूकर आंख, नाक, मुंह छूने से भी ये फैलता है।
- कौन से लक्षण दिखते ही सतर्क हो जाएं?
लक्षण 1 से 4 दिन में दिखते हैं। बीमारी दिखने से 1 दिन पहले और बाद में 3-4 दिन तक व्यक्ति वायरस फैला सकता है।
खतरे के लक्षण:
- तेज बुखार
- लगातार खांसी और गले में खराश
- नाक बहना या बंद होना
- शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान
- सांस लेने में दिक्कत, उल्टी, दस्त – ये गंभीर स्थिति का संकेत है
आमतौर पर फ्लू जैसे लक्षण 1 हफ्ते में ठीक हो जाते हैं। लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वालों में ये जानलेवा भी हो सकता है।
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इलाज और बचाव कैसे करें?
इलाज में एंटीवायरल दवाएं, पूरा आराम और ORS जैसे तरल पदार्थ दिए जाते हैं। तबियत बिगड़ने पर लक्षण के हिसाब से इलाज होता है। इसलिए बचाव जरूरी है।
बचाव के 4 तरीके:
- साबुन या सैनिटाइजर से हाथ बार-बार धोएं
- खांसते-छींकते समय रूमाल/टिश्यू से मुंह ढकें
- भीड़ वाली जगह पर मास्क लगाएं, सतहों को साफ रखें
- लक्षण दिखें तो तुरंत मास्क लगाकर डॉक्टर से मिलें




