राँची: मॉरीशस स्थित एसएसआर (SSR) मेडिकल कॉलेज से जुड़े बहुचर्चित धोखाधड़ी मामले में रांची सिविल कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कॉलेज के अध्यक्ष रुद्र प्रताप नारायण सिंह और सचिव रणजीत कौर की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अपर न्यायायुक्त देवाशीष महापात्र की अदालत के इस फैसले के बाद अब दोनों आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
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क्या है पूरा विवाद?
यह मामला रांची के अरगोड़ा निवासी अजय कुमार की शिकायत पर आधारित है। प्राथमिकी के अनुसार, साल 2018 में मेडिकल कॉलेज ने लुभावने विज्ञापन देकर तय सीट से कहीं अधिक छात्रों का एमबीबीएस में नामांकन लिया था। पीड़ित छात्रों और परिजनों का आरोप है कि उक्त कॉलेज में नामांकन के नाम पर प्रत्येक छात्र से करीब 50 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली गई। आरोप है कि कॉलेज स्टाफ के जरिए छात्रों को इस कदर प्रताड़ित किया गया कि वे कॉलेज छोड़ने पर मजबूर हो जाएं। प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा में बैठने के नाम पर छात्रों से 3000 डॉलर की अतिरिक्त मांग की गई। परीक्षा से ठीक पहले करीब 45 छात्रों को जानबूझकर फेल घोषित कर दिया गया ताकि उन्हें मुख्य परीक्षा में बैठने से रोका जा सके।
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फरार घोषित करने की तैयारी
आरोपियों की चालाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे कोर्ट की कार्यवाही से लगातार बच रहे हैं। इसी कारण न्यायिक दंडाधिकारी एमके सिंह की अदालत ने पहले ही आरोपियों के खिलाफ इश्तहार जारी कर दिया है। यदि वे जल्द ही सरेंडर नहीं करते हैं, तो उनकी संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
दिल्ली से मॉरीशस तक फैला नेटवर्क
जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने अपना मेडिकल कॉलेज तो मॉरीशस में स्थापित किया है, लेकिन इसका मुख्य प्रशासनिक कार्यालय दिल्ली से संचालित होता है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इसी कार्यालय के जरिए ठगी का पूरा जाल बुना गया था।
हाई कोर्ट में भी मामला लंबित
एक तरफ सिविल कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ आरोपियों ने झारखंड हाई कोर्ट में प्राथमिकी निरस्त करने की गुहार लगाई है। हालांकि, वहां भी मामला अभी लंबित है और फिलहाल उन्हें कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिली है।
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