न्यूज डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं की सुनवाई में केंद्र सरकार ने कहा रुस-यूक्रेन युद्ध में रुसी सेना के लिए लड़के गए 10 भारतीय लोगों की मौत हो गई. आरोप है कि ज्यादातर लोगों को नौकरी का झांसा देकर रुस ले जाकर उन्हें जबरन युद्ध में धकेला गया था, लेकिन सरकार ने कोर्ट में कहा कि अधिकांश लोग अपनी मर्जी से गए थे. मरने वालों में सबसे ज्यादा युवा है.
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सरकार बोले अपनी मर्जी से गए
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा कि रुस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में फंसे कई भारतीय नागरिकों ने अपनी मर्जी से कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किया था और इस संघर्ष में फंस गए. युद्ध में फंसे 26 भारतीय पुरुषों के परिवार ने द्वारा दायर याचिका पर विदेश मंत्रालय ने सुनवाई के दौरान यह कहा था. इस याचिका में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित वापसी और मारे गए लोगों के पार्थिव शरीर भारत लाने की गुहार लगाई गई है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता पर की गई.
29 भारतीयों में 10 की मौत
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एश्वर्या भाटी ने सरकार के पक्ष में कई जानकारियां दी. उन्होंने कहा कि 26 में से 10 भारतीयों की मौत हो गई है. वहीं एक व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज है और एक अन्य व्यक्ति जानबूझकर वहीं रुका हुआ है. ASG ने कहा कि इन लोगों ने अपनी मर्जी से कॉन्ट्रैक्ट साइन कर रहा और कुछ एजेंट उन्हें ऐसा करने को उकसा रहे है.
सरकार ने कहा प्रशासन एक बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है और लोगों को ऐसे कॉन्ट्रैक्ट को स्वीकार करने से रोक रहे है. अधिकारी सभी 26 लोगों के परिजनों से संपर्क में है और लापता लोगों की स्थिति व ठिकानों का पता लगा रही है. इसके साथ ही वे मृतकों के पार्थिक शरीर को वापस लाने की कोशिश कर रही है.
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नौकरी का झांसा देकर भेजा रुस
परिवारों का ओर से पेश हुए वकील ऋत्विक भनोट ने आरोप लगाया कि विदेश मंत्रालय लापरवाह और निष्क्रियता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इन लोगों को रुस में नौकरी देने के नाम पर झूठा देकर ठगा है. उनका पासपोर्ट जब्त कर उन्हें जबरन युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया. मृतकों की सही पहचान और पार्थिक शरीर वापस लाने के लिए परिजनों से डीएमए सैंपल की मांग की गई है.
परिवारों को अबतक नहीं मिली जानकारी
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि अबतक उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें. वहीं इससे पहले कोर्ट ने 26 परिवार की याचिका पर केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और रुस में भारत के राजदूत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
परिवारों की मांग है कि सरकार उनके रिश्तेदारों की सुरक्षा, कानूनी स्थिति और ठिकानों का पता लगाकर तुरंत हस्तक्षेप करें. युवाओं को शिक्षा और नौकरी का झूठा वादा लेकर रुस भेजा गया और इतने अपीलों के बाद भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है कि वे हिरासत में है. घायल है या फिर जबरन युद्ध लड़ रहे है.


