Friday, April 3, 2026

ऑपरेशन मेघाबुरु में 17 माओवादी ढेर, डीजीपी की कड़ी चेतावनी – मुख्यधारा में लौटने का अंतिम मौका

सारंडा: झारखंड को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मिली है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने और दुर्गम सारंडा जंगल में चलाए गए ऑपरेशन मेघाबुरु के तहत भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता समेत 17 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया गया। इस ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद चाईबासा में राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा और सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे अभियान की जानकारी दी और बचे नक्सलियों को अंतिम चेतावनी दी।

38827f7e 17db 456a a6a8 fec7e3d595d0ऑपरेशन मेघाबुरु 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि ऑपरेशन मेघाबुरु झारखंड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस अभियान में भाकपा माओवादी के कुख्यात शीर्ष नेता अनल दा उर्फ पतिराम माझी समेत कुल 17 नक्सली मारे गए हैं। मारे गए नक्सलियों में कई ऐसे कमांडर शामिल थे, जिन पर एक करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नक्सलियों के संगठनात्मक ढांचे के लिए बड़ा झटका है।

दो दिनों में निर्णायक कार्रवाई

सुरक्षा बलों द्वारा बताया गया कि सारंडा के माओवादी गढ़ में यह अभियान लगातार दो दिनों तक चला। इस दौरान सर्च ऑपरेशन और रणनीतिक घेराबंदी के जरिए नक्सलियों को एक सीमित इलाके में इकट्ठा होने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद निर्णायक कार्रवाई करते हुए 17 हार्डकोर माओवादियों को ढेर कर दिया गया। इसे वर्ष 2026 की सबसे बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाई माना जा रहा है। डीजीपी के अनुसार, यह ऑपरेशन करीब 35 घंटे तक लगातार चला। इसमें जिला पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर (जेजे टीम) ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। घने जंगल, पहाड़ी रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने अदम्य साहस और ठोस रणनीति के साथ अभियान को सफल बनाया।

62098084 20ea 4626 ba1a 99fe6546a2bf

भारी मात्रा में हथियार बरामद

ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के पास से 14 अत्याधुनिक एके-47 और इंसास राइफल, साथ ही अन्य हथियार, गोला-बारूद और नक्सली सामग्री बरामद की है। डीजीपी ने कहा कि यह बरामदगी नक्सलियों की सैन्य क्षमता को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाएगी और उनके नेटवर्क को बड़ा झटका देगी। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इस साहसिक कार्रवाई में शामिल जवानों के लिए पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा कि कोबरा बटालियन को 4 लाख रुपये, सीआरपीएफ को 1 लाख रुपये, झारखंड पुलिस को 1 लाख रुपये और झारखंड जगुआर को 1 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा, माओवादियों पर घोषित कुल इनामी राशि को नियमानुसार इस अभियान में शामिल जवानों और अधिकारियों के बीच वितरित किया जाएगा।

नक्सलियों को अंतिम चेतावनी

डीजीपी ने नक्सलियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब उनके पास बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अंतिम मौका है। सरकार की पुनर्वास नीति उनके लिए खुली है, लेकिन हिंसा का रास्ता अपनाने वालों के खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह ने कहा कि नक्सली अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुके हैं। उन्होंने बचे हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए हरसंभव सहायता देगी, लेकिन जो हथियार उठाए रखेंगे, उन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने साफ कहा, “अभियान लगातार जारी रहेगा और उग्रवादियों को किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।”

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी

इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी अभियान माइकल राज एस, झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे, डीआईजी इंद्रजीत महथा, डीआईजी अनुरंजन केरकेट्टा, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु समेत कई वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सारंडा लंबे समय से माओवादियों का मजबूत गढ़ रहा है। ऑपरेशन मेघाबुरु के तहत एक साथ 17 हार्डकोर माओवादियों का मारा जाना सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क के लिए करारा झटका है। इससे न केवल संगठन की कमर टूटी है, बल्कि बचे नक्सलियों का मनोबल भी कमजोर हुआ है।

झारखंड को नक्सलमुक्त बनाने का संकल्प

अधिकारियों ने दोहराया कि झारखंड को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा। सारंडा, कोल्हान और अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बल सतत अभियान चला रहे हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय बलों का स्पष्ट संदेश है कि अब झारखंड में उग्रवाद के लिए कोई जगह नहीं है। ऑपरेशन मेघाबुरु ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में है। एक करोड़ के इनामी नक्सली समेत 17 माओवादियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा बल पूरी तरह आश्वस्त हैं कि शांति बहाली का लक्ष्य अब दूर नहीं। अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी कीमत पर उग्रवादियों को बख्शा नहीं जाएगा।

App Logo Download App ➥

एयर नाउ स्पेशल

प्लेन हादसे में गवां चुके हैं सीएम, पूर्व सीएम...

दिल्ली: भारत के राजनीतिक इतिहास में कई ऐसे दुखद हादसे दर्ज हैं, जब देश के बड़े नेता विमान या हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं का शिकार हो...
- Advertisement -spot_img
App Logo

Download Our App

Download Now ➥

ट्रेंडिंग खबर

Instant Chat
Hello! क्या आप अपने एरिया का कोई खबर भेजना चाहते है?
error: Content is protected !!