मेदिनीनगर : डुमरी विधायक जयराम महतो मंगलवार को पलामू पहुंचे. मेदिनीनगर में जेएलकेएम के प्रमंडलीय कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने पलामू सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने भाषा के सवाल से लेकर JPSC-JSSC की परीक्षा व्यवस्था तक पर सरकार को घेरा.
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जयराम महतो ने कहा कि झारखंड में भाषा को लेकर फैसला ऊपर से थोपने के बजाय जमीन पर सर्वे कराया जाना चाहिए. इसके लिए भाषा मित्रों के नेतृत्व में एक टीम गठित हो. टीम में भाषा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को शामिल किया जाए. यह टीम गांव-गांव जाकर सर्वे करे और पता लगाए कि ग्रामीण वास्तव में किस भाषा में बातचीत करते हैं.
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जिले की जगह प्रखंडवार भाषा चयन की वकालत
जयराम महतो ने कहा कि सर्वे के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाए और उसी के आधार पर भाषा को लेकर निर्णय लिया जाए. उन्होंने पलामू का उदाहरण देते हुए कहा कि जिले में 21 प्रखंड हैं. ऐसे में पूरे जिले के लिए एक ही भाषा का फैसला उचित नहीं होगा. भाषा का चयन प्रखंड स्तर पर होना चाहिए.उन्होंने कहा, “एक कोस में पानी और वाणी बदल जाती है.” इसलिए जिस क्षेत्र में जो भाषा व्यवहार में है, उसके आधार पर ही भाषा से जुड़ी नीति तैयार की जानी चाहिए.
JPSC-JSSC पर फिर सरकार को घेरा
जयराम महतो ने JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कई परीक्षाएं सवालों के घेरे में हैं और अभ्यर्थी लगातार सवाल उठा रहे हैं. उनके अनुसार धन का लालच परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डाल रहा है.उन्होंने कहा कि एक-एक अभ्यर्थी मामलों की पोल खोलने में लगा है. ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवाओं के भरोसे के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है.
मंच से सलाह देने वाले पहले खुद अमल करें
जयराम महतो ने नेताओं और ब्यूरोक्रेसी पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि मंच से नेता और ब्यूरोक्रेट अक्सर कहते हैं कि कफन में जेब नहीं होती. इसके बावजूद धन जमा करने की होड़ जारी है.उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस दुनिया से जाने के बाद जमा किया गया धन साथ नहीं जाना है तो इतनी संपत्ति जमा करने की जरूरत क्या है.जयराम महतो ने कहा कि युवाओं और अभ्यर्थियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है. परीक्षा व्यवस्था में उठ रहे सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए.


