रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति मामले में बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस दीपक रोशन की बेंच में हुई सुनवाई में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के खिलाफ अंजु कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से याचिका दायर की गई थी। दरअसल, JSSC की ओर से जारी नोटिस में कहा गया था कि अभ्यर्थियों ने जिस विषय में नियुक्ति के लिए आवेदन किया है, उस संबंधित विषय में तीन वर्षों तक पढ़ाई नहीं की है।
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जेएसएससी के नोटिस पर मामला हाईकोर्ट में
जेएसएसी ने इस आधार पर कुछ अभ्यर्थियों की पात्रता पर सवाल उठाए तो इस नोटिस के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इसे गलत बताते हुए रद्द करने की मांग की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता चंचल जैन और अमृतांश वत्स ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस तरह का नोटिस जारी करना अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।
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444 पदों पर होनी है नियुक्ति
बाल कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग में कुल 444 महिला सुपरवाइजर पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए JSSC ने पहले विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा भी आयोजित की जा चुकी है और उसका परिणाम भी जारी कर दिया गया है। अब अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।


