रांची : राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि कृषि अनुसंधान को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना होगा। ऐसी तकनीक एवं पद्धतियाँ विकसित करने पर ध्यान देना होगा, जिनसे किसान सीमित भूमि एवं संसाधनों में अधिक उत्पादन एवं आय प्राप्त कर सकें, उत्पादन लागत कम हो तथा मिट्टी एवं जल का संरक्षण हो।
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उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि किसान के खेत में दिखाई देनी चाहिए। राज्यपाल आज बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, राँची के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, जल-संकट, मृदा स्वास्थ्य तथा छोटे एवं सीमांत किसानों की समस्याओं जैसी चुनौतियों के बीच विज्ञान और नवाचार की भूमिका बढ़ गई है। AI, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, सटीक कृषि और आधुनिक सिंचाई जैसी तकनीकों का उपयोग तभी सार्थक है, जब वे किसानों के लिए उपयोगी और व्यावहारिक हों।
झारखण्ड की कृषि के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पठारी भू-भाग के कारण वर्षाजल का बड़ा हिस्सा बह जाता है और अनेक क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा सीमित है। इसलिए जल संरक्षण, वर्षाजल के बेहतर उपयोग, सिंचाई के विस्तार तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधीकरण एवं कृषि तकनीक पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय उन्नत फसल प्रभेदों, बीज एवं पौध सामग्री, प्रशिक्षण, परामर्श तथा कृषि प्रसार के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय से शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार को और व्यापक बनाने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि कृषि-आधारित स्टार्टअप, खाद्य प्रसंस्करण, बागवानी, पशुपालन, मत्स्यपालन और अन्य क्षेत्रों में युवाओं के लिए अनेक अवसर हैं। युवाओं को रोजगार पाने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने का भी प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प में कृषि क्षेत्र की प्रगति और किसानों का कल्याण महत्वपूर्ण है। इस दिशा में युवा कृषि वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, उद्यमियों और विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी बेटियाँ शिक्षा, विज्ञान, कृषि अनुसंधान और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान को खेत तक, विज्ञान को किसान तक और नवाचार को समाज तक पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की वास्तविक सार्थकता उसके सामाजिक लाभ में है। इस अवसर पर राज्यपाल ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’ दिवंगत शिबू सोरेन जी की धर्मपत्नी एवं मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की माताजी रूपी सोरेन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शिबू सोरेन जी का राज्य निर्माण में अहम योगदान रहा है। उन्होंने दिवंगत रूपी सोरेन जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।


