रांची: सुप्रीम कोर्ट ने DGP तदाशा मिश्रा को हटाने पद से हटाने से इंकार किया. याचिकाकर्ता द्वारा तदाशा मिश्र को हटाने का आदेश देने की मांग की, जिस पर कोर्ट ने कहा कि तदाशा मिश्र का पक्ष सुने बिना उन्हें नहीं हटा सकते. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने अमेकस क्यूरी को निर्देश दिया कि सभी राज्यों में हुई डीजीपी की नियुक्ति को लेकर समीक्षा करके रिपोर्ट दें. हालांकि कोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा बनायी गयी DGP नियुक्ति नियमावली को गलत बताया.
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झारखंड सरकार द्वारा बनायी गयी नियुक्ति नियमावली पर Amicus Curiae और केंद्र सरकार की राय अलग-अलग थी. केंद्र सरकार की ओर से मामले की सुनवाई के दौरान यह कहा गया कि झारखंड सरकार द्वारा बनायी गयी DGP नियुक्ति नियमावली, प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये दिशा निर्देश के खिलाफ है. इसमें UPSC की भूमिका नहीं के बराबर है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इंपैनल कमेटी की बैठक UPSC की अध्यक्षता में होती है. लेकिन झारखंड सरकार द्वार बनायी गयी नियमावली मे UPSC के एक सदस्य को शामिल किया गया है.
Amicus Curiae ने झारखंड नियुक्ति नियमावली में सिर्फ दो धाराओं पर आपत्ति की है. बाकी धाराओं को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के खिलाफ नहीं माना है. Amicus Curiae ने अपनी रिपोर्ट में नियुक्ति नियमावली में संशोधन कर रिटायरमेंट से एक दिन पहले तदाशा मिश्रा को DGP की नियुक्ति को गलत बताया है. रिटायरमेंट से एक दिन पहले DGP के पद पर नियुक्त करने को केंद्र सरकार ने भी गलत माना है.
29 सितंबर को हुई आंशिक सुनवाई के दौरान भी केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने DGP नियुक्ति नियमावली को गलत बताया था. साथ ही यह भी कहा था कि केंद्र ने नियमावली के मामले में अपनी राय छह महीना पहले कोर्ट को दे दी है. साथ ही नियुक्ति नियमावली बनाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवमानना बताते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया था. जवाब में कपिल सिब्बल ने यह कहा था कि उन्हें इससे संबंधित कोई नोटिस नहीं नहीं मिला है. ना ही केंद्र सरकार द्वारा दाख़िल की गयी रिपोर्ट से संबंधित कोई जानकारी है.


